नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पुलिस और जांच एजेंसियों की एक टीम ने पाया कि एक साधारण रैपिडो ड्राइवर के बैंक खाते में अचानक 19 अगस्त 2024 से 14/16 अप्रैल 2025 के बीच 331.36 करोड़ जमा हुए थे। यह वही वही ड्राइवर था, जिसकी हालत इतनी खराब थी कि वो अपनी खुद की झोपड़ी की मरम्मत भी नहीं कर पाता था। लेकिन फिर अचानक उसके खाते में इस भारी रकम का आना अपने आप में एक चौंकाने वाला संकेत था।
मामला क्या है मनी लॉन्ड्रिंग और म्यूल अकाउंट
जांच में पाया गया कि यह खाता म्यूल अकाउंट की तरह इस्तेमाल किया गया। म्यूल अकाउंट उन बैंक खातों को कहते हैं। जिनका इस्तेमाल ठग या अपराधी चंद पैसों को कानूनी दिखाने लॉन्ड्रिंग के लिए करते हैं। इस पूरे पैसों के नेटवर्क का लिंक एक ऑनलाइन बेटिंग ऐप 1xBet से मिला। यानी, सट्टेबाज़ी में मिले अवैध धन को इस ड्राइवर के खाते में भेजा गया बिना उसके ज्ञान या सहमति के। बाद में, वही पैसा निकाल कर एक बहुत बड़ी शाही शादी में इस्तेमाल हुआ। जो कि एक भव्य “डेस्टिनेशन वेडिंग” थी।
हजारों लगे थे मुंह, और पैसों की बोझिल गुत्थी
बताया जाता है कि यह शादी ताज अरावली रिजॉर्ट में हुई थी एक बहुत ही आलीशान रिजॉर्ट। इसी शादी में भारी खर्च हुआ, और लाखों/करोड़ों रुपए की ट्रांजैक्शन इसी ड्राइवर के अकाउंट से पास हुए। शादी में शामिल लोगों में बड़े-बड़े बिजनेस व्यक्ति, सोशलाइट्स और ग्लोबल सेलेब्रिटीज़ जो पहले से ही चर्चित थे। इस तरह यह मामला सिर्फ एक बैंक फ्रॉड नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का संकेत बन गया।
क्यों है यह मामला खतरनाक – आम लोगों पर असर, चेतावनी
यह दिखाता है कि कैसे धड़ल्ले से मनी-लॉन्ड्रिंग होती है गरीब, आम लोगों जैसे ड्राइवर, मजदूर, डिलीवरी बॉय आदि का बैंक खाता म्यूल अकाउंट बन जाता है, बिना उनकी जानकारी के। सरकार ने कई लोगों के लिए बैंक खाते खुले ताकि सब आर्थिक रूप से जुड़ सकें लेकिन अपराधी उसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं। एक छोटी-सी लापरवाही जैसे अपना खाता किसी के नाम इस्तेमाल करने देना भविष्य में भारी पड़ सकती है। जांच एजेंसियाँ इस बात की गंभीरता बता रही हैं कि किस तरह लोग अपने बुनियादी जरूरतों के लिए डरकर, झांसे में आ कर ऐसे खतरनाक नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं जानबूझ कर या अनजाने में, ईडी की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह पूरा नेटवर्क कितने लोगों, कितने खातों का इस्तेमाल कर चुका है। साथ ही यह देखने की कोशिश हो रही है कि इस मनी-लॉन्ड्रिंग का असल मास्टरमाइंड कौन है और असली पैसों का स्रोत व गंतव्य कहां है। इस केस ने देशभर में एक बार फिर से चेतावनी दी है कि बैंक खाते, नेट-बैंकिंग या डिजिटल लेनदेन के मामलों में बेहद सावधानी बरतनी चाहिए।





