नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को पॉक्सो एक्ट के एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राजद के पूर्व विधायक राजवल्लभ यादव समेत सभी छह आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह सभी पहले निचली अदालत से दोषी ठहराए गए थे और उम्रकैद या 10 साल की सजा काट रहे थे।
2018 में सुनाई गई थी उम्रकैद
15 दिसंबर 2018 को नवादा की विशेष MAL/MP कोर्ट ने राजवल्लभ यादव को अपने बिहारशरीफ स्थित आवास पर 6 फरवरी 2016 को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।सह-आरोपी सुलेखा देवी और उनकी मां राधा देवी को भी उम्रकैद और 20,000 रुपये जुर्माना हुआ था। छोटी देवी, संदीप सुमन और तुसी देवी को 10-10 साल की कठोर कारावास और 10,000 रुपये जुर्माना मिला था।
हाईकोर्ट में अपील और सुनवाई
सभी दोषियों ने निचली अदालत के फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने की। अपीलार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह और अजय कुमार ठाकुर ने पैरवी की। पीड़िता की ओर से एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अनुकृति जयपुरियार ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता दिलीप सिन्हा ने तर्क प्रस्तुत किए।
निर्णय 7 मई को सुरक्षित, अब आया फैसला
7 मई 2025 को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस केस में सजा होने के बाद राजवल्लभ यादव की विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई थी। यह मामला बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा में रहा। अब बरी होने के बाद इसके राजनीतिक और कानूनी दोनों असर देखे जाएंगे।





