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Wednesday, March 4, 2026
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मनरेगा में किए बदलाव के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश, बताया दलित और गरीब विरोधी

पंजाब विधानसभा में मनरेगा में किए गए बदलावों के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे सरकार ने दलित और गरीब विरोधी बताते हुए सामाजिक न्याय पर सीधा हमला करार दिया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पंजाब विधानसभा में मनरेगा (MNREGA) में किए गए बदलावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। 30 दिसंबर को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ जोरदार प्रस्ताव पेश किया। पंजाब सरकार ने इन बदलावों को सीधे तौर पर दलितों और गरीबों के हितों पर हमला बताया और कहा कि इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था और सामाजिक न्याय दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।

सरकार का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि दलित और गरीब परिवारों की आजीविका, आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जीवनरेखा है। प्रस्ताव में साफ कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों का सबसे ज्यादा नुकसान दलित समुदाय को होगा, जो बड़ी संख्या में इस योजना पर निर्भर है। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने आरोप लगाया कि मनरेगा को कमजोर करने की यह कोशिश दरअसल इसे धीरे-धीरे खत्म करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

प्रस्ताव के दौरान पंजाब सरकार ने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। सरकार ने कहा कि बीजेपी ने दलित परिवारों से वोट मांगने का नैतिक अधिकार खो दिया है, क्योंकि उसे उनकी रोजी-रोटी और रोजगार की कोई चिंता नहीं है। सरकार के मुताबिक, मनरेगा पर हमला सिर्फ एक योजना पर नहीं, बल्कि दलितों की गरिमा, अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर सीधा वार है। साथ ही शिरोमणि अकाली दल की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए गए।

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM-G कर दिया। पंजाब सरकार ने इस नाम परिवर्तन को भी गरीब विरोधी कदम करार दिया और कहा कि इससे मूल कानून की आत्मा कमजोर हो रही है। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया, जिसमें मनरेगा अधिनियम में किए गए सभी बदलावों को वापस लेने की मांग रखी गई।

हालांकि इस विशेष सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं रखा गया, लेकिन सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह गरीबों और दलितों के अधिकारों से जुड़े इस मुद्दे पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी। पंजाब सरकार ने केंद्र से मनरेगा को मूल स्वरूप में बनाए रखने और दलित-गरीब वर्ग के हितों की रक्षा करने की मांग दोहराई।

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