नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को संभल के पूर्व पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज कुमार चौधरी और कई अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश पर रोक लगा दी। अनुज चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति समित गोपाल ने यह आदेश पारित किया। अनुज कुमार चौधरी ने नौ जनवरी को सीजेएम द्वारा दिए गए आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए फिलहाल प्राथमिकी पर रोक लगा दी।
अगली सुनवाई 24 फरवरी को, राज्य सरकार भी चुनौती लेकर अदालत पहुंची
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल के पूर्व सीओ अनुज कुमार चौधरी और अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को तय की है। अनुज चौधरी की याचिका के अलावा राज्य सरकार ने भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। अदालत दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है, जिससे इस मामले की दिशा और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें लगी हुई हैं।
युवक के पिता की याचिका पर CJM ने सुनवाई की
मामला तब शुरू हुआ जब तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने आलम नामक युवक के पिता यामीन द्वारा दायर याचिका को स्वीकार किया। याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 (4) के तहत दायर की गई थी, जिसके आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।
अर्जी में युवक के पिता ने पुलिस पर गोली चलाने का आरोप लगाया
यामीन ने अपनी अर्जी में दावा किया कि 24 नवंबर 2024 को सुबह लगभग पौने नौ बजे उनका बेटा आलम जामा मस्जिद के पास ठेले पर ‘रस्क’ और बिस्कुट बेच रहा था। तभी कुछ पुलिस कर्मियों ने अचानक भीड़ पर गोली चलानी शुरू कर दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। यामीन ने इसी घटना के आधार पर संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
अर्जी में नामजद हुए अनुज चौधरी और कोतवाली प्रभारी
अलम के पिता यामीन की अर्जी में संभल के पूर्व सीओ अनुज कुमार चौधरी और कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर को नामजद किया गया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने अपने 11 पन्नों के आदेश में स्पष्ट कहा कि पुलिस अधिकारी आपराधिक कृत्यों के लिए अपने आधिकारिक कर्तव्य की आड़ नहीं ले सकते और इस आधार पर उन्होंने संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
CJM ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा—‘गोलीबारी आधिकारिक कर्तव्य नहीं’
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने अपने आदेश में उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति पर गोलीबारी को आधिकारिक कर्तव्यों का पालन नहीं माना जा सकता। प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के रूप में यह मामला देखा गया, और सीजेएम ने कहा कि केवल उपयुक्त और निष्पक्ष जांच के माध्यम से ही सच्चाई सामने आ सकती है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।





