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Monday, March 2, 2026
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महाराष्ट्र में फडणवीस और एकनाथ शिंदे में बढ़ रही दूरी ? एक साथ नहीं साझा कर रहे मंच, अटकलों का बाजार गर्म

महाराष्ट्र में बीजेपी और शिंदे गुट के बीच संबंध सामान्य नहीं दिखे रहे हैं। उप मुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे लगातार कई कार्यक्रमों से नदारद रहे हैं। जिसको लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । महाराष्ट्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच सबकुछ सामान्य नहीं दिख रहा। हाल के सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों में यह स्पष्ट नजर आया कि शिंदे फडणवीस के साथ मंच साझा करने से लगातार बच रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बीते कुछ सप्ताह में कई अहम सरकारी कार्यक्रमों और कैबिनेट बैठकों से शिंदे ने दूरी बनाए रखी है, जिससे दोनों नेताओं के बीच टकराव की अटकलें तेज हो गई हैं। भले ही आधिकारिक रूप से कुछ भी सामने न आया हो, लेकिन दोनों नेताओं की सार्वजनिक मौजूदगी में आई कमी ने बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) के रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है असर

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि एकनाथ शिंदे का फडणवीस से दूरी बनाना सिर्फ गठबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पार्टी और प्रशासन दोनों में महसूस किया जा रहा है। शिवसेना (शिंदे गुट) के अंदर यह संकेत जा रहा है कि नेतृत्व में तालमेल की कमी है, जिससे कार्यकर्ता और संगठन असमंजस में हैं। यही नहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी फैसलों और दिशा-निर्देशों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम का असर शिवसेना की लोकल बॉडी चुनाव की तैयारियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे माहौल में अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक हो जाना गठबंधन के लिए रणनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।

एकनाथ शिंदे बार-बार कार्यक्रमों से गायब

हाल ही में पुणे में आयोजित डबल ब्रिज के उद्घाटन समारोह में शिंदे मौजूद नहीं रहे। इसी तरह छत्रपति संभाजीनगर में मराठवाड़ा के लिए ड्रिंकिंग वॉटर प्रोजेक्ट लॉन्च करना था, लेकिन वहां भी उप मुख्यमंत्री शिंदे की अनुपस्थिति ने सबको चौंकाया। मुंबई में आयोजित शिवसेना के रक्षाबंधन कार्यक्रम से भी शिंदे नदारद रहे, जिससे पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में निराशा देखी गई। यह आयोजन शिवसेना के लिए विशेष महत्व रखता था। 

इसके अलावा, राज्य प्रशासन से जुड़ी दो लगातार कैबिनेट बैठकों में भी शिंदे की गैरहाजिरी दर्ज की गई। कानून-व्यवस्था को लेकर आयोजित एक अहम बैठक में भी वे शामिल नहीं हुए। हैरानी की बात यह है कि शिंदे के कार्यालय की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन कार्यक्रमों में उनकी अनुपस्थिति का कारण क्या था। जबकि सभी जगह फडणवीस की मौजूदगी पहले से तय थी। इन घटनाओं को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि महाराष्ट्र में बीजेपी और शिंदे गुट के बीच संबंध सामान्य नहीं हैं और इसका असर भविष्य की रणनीति और गठबंधन की मजबूती पर भी पड़ सकता है।

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