नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के घटक दलोंबीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट)के बीच चल रही कथित अनबन और कार्यकर्ताओं के एक-दूसरे के दलों में शामिल होने की ख़बरों पर बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्य मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की प्रतिक्रिया सामने आई है। बावनकुले ने शुक्रवार को मुंबई में मीडिया से बातचीत में माना कि लोकल लेवल पर कुछ खटपट हो रही है, लेकिन बड़े स्तर पर गठबंधन मजबूत है।
‘लोकल लेवल पर थोड़ी खटपट तो होगी, तीन दल हैं’
बीजेपी नेता ने स्वीकार किया कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता दल बदल रहे हैं, लेकिन उन्होंने किसी बड़ी दरार से इनकार किया। बावनकुले ने कहा, लोकल लेवल पर बीजेपी के कार्यकर्ता शिवसेना में और शिवसेना के कार्यकर्ता बीजेपी में जा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि एकनाथ शिंदे के कार्यकर्ता बीजेपी को डैमेज कर रहे हैं और अजित दादा के कार्यकर्ता बीजेपी की सरकार को डैमेज कर रहे हैं।
उन्होंने खटपट को स्वाभाविक बताते हुए कहा, लोकल लेवल पर थोड़ी खटपट तो होगी। गठबंधन में तीन दल हैं। स्थानीय लेवल पर सभी कॉर्पोरेटर, जिला पंचायत और जिला परिषद में जाना चाहते हैं।उन्होंने विपक्ष महाविकास अघाड़ी (एमवीए) पर निशाना साधते हुए कहा, हमारे कार्यकर्ता महाविकास अघाड़ी की तरह एक दूसरे को काटने नहीं जा रहे हैं।
‘शिंदे सरकार के साथ पूरी ताक़त से खड़े थे’
बावनकुले ने ज़ोर देकर कहा कि,बीजेपी ने हमेशा गठबंधन धर्म निभाया है। उन्होंने याद दिलाया कि जब पहले शिवसेना (शिंदे) की सरकार थी, तब बीजेपी पूरे आत्मविश्वास के साथ उनके साथ खड़ी थी।
उन्होंने कहा, जब शिवसेना की सरकार थी जो बीजेपी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ एकनाथ शिंदे के साथ खड़ी थी। हमने अपने कार्यकर्ताओं में यही विश्वास रखा कि हमारी सरकार अच्छा काम करके महाराष्ट्र को मजबूत करने जा रही है।बावनकुले ने दावा किया कि उनके 1 करोड़ 51 लाख कार्यकर्ता जिम्मेदारी के साथ एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के साथ खड़े हैं। उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना और अजित दादा के कार्यकर्ता भी सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं।
वित्तीय बोझ पर टिप्पणी
राज्य पर आए वित्तीय बोझ के सवाल पर बावनकुले ने कहा कि राज्य पर 32,000 करोड़ रुपये का नया बर्डन आया था। उन्होंने इसका कारण बाढ़ से किसानों को हुए नुकसान को बताया।उन्होंने कहा कि इससे थोड़ा वित्तीय संकट तैयार हुआ था, लेकिन सरकार ने उससे निपट लिया है। उन्होंने माना कि इस वजह से काम थोड़ा धीमा हुआ, लेकिन बैंकों की मदद से सरकार इससे उबर गई है।




