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जामिया मिलिया इस्लामिया में वैदिक मंत्रों का उच्चारण और सरस्वती वंदना

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। पुलिस एवं छात्रों के बीच हुई हिंसा और एनआरसी के सतत विरोध के कारण बीते वर्ष सुर्खियों में रहे जामिया विश्वविद्यालय में अब वैदिक मंत्रों का उच्चारण और सरस्वती वंदना की जा रही है। जामिया मिलिया इस्लामिया में सोमवार को वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण तथा सरस्वती वंदना की गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में संस्कृत गीतों का गायन भी आयोजित किया गया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि संस्कृत विभाग द्वारा दस दिवसीय आनलाइन संस्कृत संभाषण कार्यशाला का आरंभ सोमवार को किया गया है। यह संभाषण कार्यशाला निशुल्क है। कार्यशाला प्रतिदिन (18 जुलाई से 27 जुलाई 2021 तक) सायं काल पांच बजे से सात बजे तक होगा। कार्यशाला के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीलाल बहादुर राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति एवं दिल्ली प्रांत, संस्कृत भारती के अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश कुमार पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि के रूप में जामिया के हिंदी विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर इन्दु वीरेंद्र एवं सारस्वत अतिथि के रूप में संस्कृत विभाग के आचार्य एवं पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र पंत उपस्थित थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण तथा सरस्वती वंदना से हुआ। प्रियंका गौतम एवं आशीष कुमार के द्वारा संस्कृत गीतों का सुमधुर गायन हुआ। मुख्य अतिथि प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि संस्कृत गीतों में जो मधुरता है वह अन्य गीतों में प्राप्त नहीं होती। वेदों एवं भारतीय संस्कृति को अच्छी तरह से समझने हेतु संस्कृत के मूल ग्रन्थों का अध्ययन आवश्यक है। संस्कृत भाषा को जानने के लिए संस्कृत संभाषण सहायक है, उपयोगी है। उन्होंने कार्यशाला की सफलता की कामना की और छात्रों हेतु यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर इंदु वीरेंद्र ने संस्कृत भाषा की महत्ता बताते हुए कहा कि यदि व्यक्ति संस्कृत भाषा बोलना सीख ले तो विश्व की अन्य भाषाओं को समझने और बोलने में बहुत आसानी होती है। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर गिरीश चंद्र पंत ने संस्कृत संभाषण की आवश्यकता क्यों है। इस विषय में अपने विचारों से अवगत कराया। संस्कृत भारती, दिल्ली प्रांत के संगठन मंत्री देवकीनंदन ने संस्कृत संभाषण की प्रक्रिया एवं इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शास्त्र के साथ साथ संभाषण जान लेने से संस्कृत भाषा और सरल हो जाती है। कार्यक्रम का सुष्ठु संचालन डॉ श्याम सुन्दर शर्मा के द्वारा किया गया। अतिथियों,समुपस्थित शिक्षकवृंद एवं छात्रों का स्वागत संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर जय प्रकाश नारायण ने किया एवं धन्यवाद- ज्ञापन विभाग के आचार्य डॉ धनंजय मणि त्रिपाठी ने किया। पांच सौ से अधिक संस्कृतानुरागियों ने इस संस्कृत संभाषण हेतु पंजीकरण कराया है। प्रशिक्षक डॉ सुमित कुमार शर्मा ने कुछ देर कक्षा भी लिया। –आईएएनएस जीसीबी/एएनएम

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