बाण लगा तो गिर पड़े, झट से पवन कुमार मुंह से था पर हो रहा, रामनाम उच्चार। रामनाम उच्चार, मूरछा भारी छाई भरतलाल ने देखा तो आंखें भर आयीं। कह ‘प्रशांत’ हे राघव कृपा दास पर कीजे इन वानर को पहले जैसा ही कर दीजे।।61।। – यह सुनते ही उठ क्लिक »-www.prabhasakshi.com




