नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। संसद में आज दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण को लेकर चर्चा हो रही है और समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को कटघरे में खड़ा किया। रामगोपाल यादव ने कहा कि दिल्ली की हवा की सफाई केवल मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की भी है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि सीएम तो एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को टेंपरचर बता देती हैं, उन्हें पता ही नहीं कि प्रदूषण क्या है।
सांसद ने साफ कहा कि अब दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण पराली नहीं बल्कि सड़कों पर धूल और वाहनों की बढ़ती संख्या है। उनका सुझाव है कि अगर प्रदूषण कम करना है तो हर व्यक्ति के पास एक से अधिक कार नहीं होनी चाहिए और पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल पर लिमिट और राशनिंग लागू की जानी चाहिए।विपक्ष के अन्य सांसद अवधेश प्रसाद ने भी कहा कि संसद में रचनात्मक चर्चा और सुझावों के आधार पर ही इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का समाधान निकल सकता है।
मनरेगा में गांधी का नाम हटाना और मजदूरी पर सवाल
रामगोपाल यादव ने मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, मैं पहले ही कह चुका हूं कि इन्हें गांधी के नाम से ही नफरत है।रामगोपाल यादव ने योजना में मजदूरी पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब मनरेगा लागू हुआ था, तो मजदूरी न्यूनतम मजदूरी के बराबर थी। लेकिन अब न्यूनतम मजदूरी 652 रुपये है, जबकि मनरेगा में मजदूरी अब भी 252 रुपये ही है। उन्होंने इसे योजना को कमजोर करने की कोशिश करार दिया और पूछा, ये क्या तीर मार रहे हैं?उन्होंने इसे योजना को खत्म करने की साजिश करार दिया और कहा कि सरकार को इसके तहत मजदूरी बढ़ाने और राज्य सरकारों से पूछने की जरूरत है कि वे इसे लागू कर सकते हैं या नहीं।
सांसद ने स्पष्ट किया कि सरकार को मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए और राज्य सरकारों से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे इसे लागू कर पाएं।
रामगोपाल यादव ने दिल्ली प्रदूषण पर राज्य और केंद्र सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया, वाहनों और ईंधन पर नियंत्रण की सिफारिश की, और मनरेगा योजना में मजदूरी कम होने और गांधी का नाम हटाए जाने पर सरकार की आलोचना की।





