नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर बुधवार को लंबी बहस के बाद इसे पास कर दिया गया। कुल 12 घंटे की चर्चा के बाद हुए मतदान में बिल के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। इस तरह, लोकसभा में बिल को आसानी से मंजूरी मिल गई। अब असली परीक्षा राज्यसभा में होगी।
सरकार को जेडीयू और टीडीपी का साथ
लोकसभा में NDA पूरी तरह से एकजुट दिखा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड JDU और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (TDP) ने भी बिल के समर्थन में वोट किया। इसकी वजह से सरकार को बहुमत हासिल करने में मदद मिली।
राज्यसभा में नंबर गेम, सरकार को बहुमत लेकिन क्रॉस वोटिंग बनी चुनौती
अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा। उच्च सदन में कुल 236 सदस्य हैं, जिनमें से 9 सीटें फिलहाल खाली हैं। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 119 बनता है। BJP के पास – 98 सदस्य NDA के कुल सदस्य – 115 मनोनीत सदस्य (6) को जोड़ने पर यह संख्या 121 हो जाती है। इस लिहाज से सरकार को राज्यसभा में भी बहुमत मिल सकता है, लेकिन अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, कांग्रेस के 27 और पूरे INDI गठबंधन के 85 सदस्य इस बिल का विरोध कर सकते हैं।
विपक्ष ने किया बिल का विरोध
लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने बिल को संविधान के खिलाफ बताया। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुसलमानों के धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर हमला करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह बिल संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन करता है।
अमित शाह ने विपक्ष को दिया जवाब
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि गैर-मुस्लिम वक्फ में शामिल होंगे। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे वोट बैंक की राजनीति के लिए अल्पसंख्यकों को डराने का काम कर रहे हैं। अब सभी की नजरें राज्यसभा पर टिकी हैं। सरकार के पास बहुमत तो है, लेकिन विपक्ष के विरोध और संभावित क्रॉस वोटिंग के चलते यह परीक्षा कड़ी हो सकती है। देखना होगा कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और क्या राज्यसभा में भी बिल लोकसभा की तरह आसानी से पास हो पाता है या नहीं।





