नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कुंडा विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के नेता रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) की पत्नी भानवी कुमारी सिंह ने दावा किया है कि उनका और उनकी दो बेटियों का नाम वोटर लिस्ट से जानबूझकर काट दिया गया है। इस मामले पर अब चुनाव आयोग और स्थानीय चुनाव अधिकारी की ओर से सफाई दी गई है।
भानवी कुमारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
भानवी कुमारी सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुला पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उनका और उनकी बेटियों राघवी कुमारी व विजय राजेश्वरी कुमारी का नाम बिना किसी सूचना के मतदाता सूची से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद भरोसा दिलाया था कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटेगा, फिर भी उनके परिवार के साथ ऐसा हुआ।
सोशल मीडिया पर दिए सबूत
भानवी कुमारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर तीन सबूत साझा किए। उन्होंने पंचायत निर्वाचक सूची का स्क्रीनशॉट दिखाते हुए दावा किया कि उनका नाम वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में दर्ज था और वर्ष 2025 की सूची में भी मौजूद था, लेकिन अब नाम गायब है। उन्होंने लिखा कि वह भदरी-बेंती परिवार की बहू हैं और पारिवारिक विवाद के बावजूद उनका और उनकी बेटियों का स्थायी निवास बेंती, कुंडा प्रतापगढ़ ही है। ऐसे में उनका नाम हटाया जाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
किसके कहने पर कटा नाम?
भानवी कुमारी ने पत्र में सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ने साफ कहा था कि किसी का नाम नहीं कटेगा, तो फिर अधिकारियों ने यह कदम किसके दबाव में उठाया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि एक ही परिवार में पुरुषों के नाम सुरक्षित रहते हुए महिलाओं के नाम काटना कितना न्यायसंगत है। उन्होंने मुख्यमंत्री और चुनाव आयुक्त से मांग की कि उनका और उनकी बेटियों का नाम तुरंत वोटर लिस्ट में जोड़ा जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई की जाए। भानवी कुमारी के आरोपों पर कुंडा विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ ने जवाब दिया है। ईआरओ कुंडा के आधिकारिक एक्स अकाउंट से कहा गया कि नियमों के अनुसार बीएलओ तीन से अधिक बार गणना प्रपत्र देने मतदाता के घर गया, लेकिन मतदाता घर पर नहीं मिलीं। परिवार के सदस्यों ने फॉर्म लेने से इनकार कर दिया। ईआरओ के अनुसार, मतदाता बाहर निवास करती हैं, इसलिए उनका फॉर्म अनकलेक्टेबल श्रेणी में डाल दिया गया, जिसके कारण नाम वोटर लिस्ट में नहीं जोड़ा जा सका।





