नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान बड़ा बयान दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र के हित में जरूरत पड़ी तो वे अपने चचेरे भाई और शिवसेना (यूबीटी) अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ आने को तैयार हैं।
“महाराष्ट्र सबसे पहले, मतभेद बाद में” – राज ठाकरे
फिल्म निर्देशक महेश मांजरेकर के साथ बातचीत में राज ठाकरे ने कहा, “महाराष्ट्र हित के सामने हमारे झगड़े और विवाद बहुत छोटे हैं। अगर महाराष्ट्र और मराठी लोगों के अस्तित्व की बात है तो मुझे नहीं लगता कि एक साथ आने में कोई कठिनाई है। उन्होंने साफ किया कि यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत इच्छा या स्वार्थ का मामला नहीं है, बल्कि एक बड़े उद्देश्य के लिए सभी मराठी नेताओं को एक साथ आना चाहिए।
राज-उद्धव में पुराना विवाद
राज ठाकरे ने 2006 में शिवसेना छोड़कर अपनी नई पार्टी MNS बनाई थी। माना जाता है कि उस वक्त बाल ठाकरे ने अपने बेटे उद्धव को पार्टी में प्राथमिकता दी, जिससे राज नाराज़ हो गए और अलग राह चुनी। एमएनएस का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया, लेकिन विधानसभा चुनाव में अकेले उतरे। 135 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सके।
एकनाथ शिंदे से मुलाकात, गठबंधन के कयास
इन दिनों राज ठाकरे मराठी भाषा को लेकर काफी सख्त हैं। उनकी पार्टी के कार्यकर्ता गैर-मराठी लोगों से जबरदस्ती मराठी बोलने के लिए कह रहे हैं। जब सरकार ने स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य भाषा बनाने की बात कही, तो राज ठाकरे ने इसका खुलकर विरोध किया। हाल ही में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे से भी मुलाकात की थी। इस पर शिंदे ने सफाई दी कि पुरानी जान-पहचान है, हर मुलाकात को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। अब सबकी नजर BMC (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव पर है। सवाल है कि क्या राज ठाकरे अकेले मैदान में उतरेंगे या उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर कोई नया राजनीतिक समीकरण बनाएंगे?





