नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र की राजनीति में दो दशक पहले अलग हुए ठाकरे बंधु उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आज (5 जुलाई) को मराठी मुद्दे पर एक साथ मंच साझा करते नजर आएंगे। बीते कुछ वर्षों में राज्य ने कई राजनीतिक उठापटक देखी हैं, ऐसे में दोनों भाइयों की यह एकता नए राजनीतिक समीकरणों की आहट मानी जा रही है।
त्रिभाषा नीति के खिलाफ राज और उद्धव ठाकरे ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद महायुति सरकार को इस निर्णय को फिलहाल टालना पड़ा। इसी के चलते आज मुंबई के वरली स्थित एनएससीआई डोम में ‘विजय सभा’ आयोजित की जा रही है, जिसे मराठी एकजुटता की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
रैली में किसी भी राजनीतिक दल का झंडा न लाने की अपील
मराठी अस्मिता के इस आयोजन में हर मराठी भाषी नागरिक, साहित्यकार, लेखक, कवि, शिक्षक, संपादक और कलाकार को आमंत्रित किया गया है। खास बात यह है कि सभा पूरी तरह गैर-राजनीतिक रहे, इसलिए आयोजकों ने सभी से अनुरोध किया है कि कोई भी पार्टी का झंडा साथ न लाएं। साथ ही, विभिन्न दलों के नेताओं से भी मराठी स्वाभिमान के इस मंच पर एकजुट होने की अपील की गई है।
विजयी सभा की रूपरेखा कैसी होगी?
– इस सभा में मंच पर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ केवल आमंत्रित सहयोगी दलों के अध्यक्ष, प्रमुख या प्रदेशाध्यक्ष ही उपस्थित रहेंगे।
– वरली स्थित एनएससीआई डोम में करीब 7 से 8 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
– डोम के भीतर, बाहर और आस-पास की सड़कों पर बड़ी संख्या में एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सभा को देख और सुन सकें।
– पार्किंग की व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए वरली डोम की बेसमेंट में लगभग 800 गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
– दोपहिया वाहनों के लिए वरली डोम के सामने तटीय सड़क के पुल के नीचे पार्किंग का इंतज़ाम किया गया है।
– महालक्ष्मी रेसकोर्स क्षेत्र को बसों और बड़ी बाहरी गाड़ियों की पार्किंग के लिए निर्धारित किया गया है।
पिछले दो दशकों में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने राजनीति में कई उतार-चढ़ावों का सामना किया है। हालांकि, आगामी महानगरपालिका चुनाव दोनों ही नेताओं के लिए राजनीतिक अस्तित्व का सवाल बन गया है। यही कारण है कि सत्तारूढ़ पक्ष इस एकजुटता को मराठी हितों से अधिक, आगामी चुनावों में संभावित लाभ के रूप में देख रहा है।
राज और उद्धव ठाकरे कब-कब एक साथ नजर आए?
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पिछले 20 वर्षों में कुछ खास मौकों पर एक ही स्थान पर दिखाई दिए हैं, हालांकि ये मुलाकातें अधिकतर सामाजिक या पारिवारिक अवसरों पर रही हैं:
17 जुलाई 2012 – जब उद्धव ठाकरे सीने में दर्द के चलते लीलावती अस्पताल में भर्ती हुए थे, तब राज ठाकरे उनसे मिलने पहुंचे थे।
10 जनवरी 2015 – मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में उद्धव ठाकरे की फोटोग्राफी प्रदर्शनी में राज ठाकरे भी शामिल हुए थे।
12 दिसंबर 2015 – एनसीपी प्रमुख शरद पवार के अमृत महोत्सव (75वें जन्मदिन) पर दोनों नेता एक ही मंच पर नजर आए।
27 जनवरी 2019 – राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे की शादी में उद्धव ठाकरे ने शिरकत की।
28 नवंबर 2019 – जब उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब राज ठाकरे भी समारोह में उपस्थित थे।
23 जनवरी 2021 – बालासाहेब ठाकरे की पूर्णाकृति प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में दोनों नेता मौजूद थे।
22 दिसंबर 2024 – राज ठाकरे की बहन जयवंती ठाकरे-देशपांडे के बेटे की शादी के अवसर पर दोनों फिर साथ दिखाई दिए।
24 फरवरी 2025 – एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के बेटे की शादी में भी दोनों नेताओं की उपस्थिति दर्ज हुई।
वास्तव में, वर्ष 2014 और 2017 के दौरान शिवसेना और मनसे के बीच एकजुटता की चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि, इस संभावित गठबंधन पर सहमति नहीं बन पाई क्योंकि यह स्पष्ट नहीं था कि समर्थन कौन देगा और नेतृत्व किसके हाथ में रहेगा। मनसे की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि उद्धव ठाकरे की तरफ से उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब जब दोनों दल कठिन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ठाकरे बंधु एक बार फिर राजनीतिक रूप से हाथ मिलाते हैं या यह केवल एक सीमित मुद्दे तक की एकता है।





