नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कुछ हटकर है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता राज ठाकरे फिलहाल विदेश यात्रा पर हैं और अब खबर है कि शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रमुख उद्धव ठाकरे भी यूरोप के लिए रवाना हो गए हैं। वे 4 मई को भारत लौटेंगे। इन दोनों नेताओं की विदेश में संभावित भेंट को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं और चर्चाएं जोरो पर हैं।
राज ठाकरे ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 29 अप्रैल तक किसी भी विवादास्पद या संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें। उनका कहना है, “मैं लौटने के बाद खुद इस पर बोलूंगा।” इस बयान ने अटकलों को जन्म दे दिया है कि राज ठाकरे किसी अहम राजनीतिक रणनीति की तैयारी में जुटे हैं।
दोनों भाईयों के बीच बढ़ रही हैं नजदीकियां
हाल के दिनों में राज और उद्धव ठाकरे के बीच फिर से नज़दीकियों की चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों भाई एक बार फिर एक साथ आ सकते हैं। दोनों ओर से मिले-जुले सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। हालांकि, राज ठाकरे अब तक अपनी रणनीति को लेकर पूरी तरह से खुलकर सामने नहीं आए हैं, जिससे उत्सुकता और बढ़ गई है।
इस बीच, राज और उद्धव ठाकरे के बीच यह गठबंधन कब होगा? क्या सचमुच कोई गठबंधन होगा? हर किसी के मन में ऐसे प्रश्न आ रहे हैं। मनसे नेता प्रकाश महाजन ने इस पर अहम प्रतिक्रिया दी है। महाजन ने कहा कि राज ठाकरे फिलहाल विदेश दौरे पर हैं और 29 अप्रैल को मुंबई लौटेंगे और खुद इस पर बात करेंगे।
प्रकाश महाजन ने क्या कहा?
प्रकाश महाजन ने सोमवार को कहा, “शाम को मुझे पार्टी नेतृत्व की ओर से बताया गया कि यह मुद्दा (गठबंधन) बहुत गंभीर है। इस मुद्दे पर अभी किसी को बात नहीं करनी चाहिए। पार्टी के किसी भी कार्यकर्ता, प्रवक्ता या नेता को इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए। राज ठाकरे अपना विदेश दौरा पूरा करने के बाद 29 अप्रैल को मुंबई आएंगे। उसके बाद वे इस बारे में बात करेंगे। राज ठाकरे के अलावा कोई और इस मुद्दे पर बात नहीं करेगा। पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसे निर्देश दिए गए हैं। इसलिए हमें इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहना है।”
दादर में पोस्टरों से गरमाई सियासत
शिवसेना भवन के पास हाल ही में एक ऐसा पोस्टर देखा गया, जिसने सभी का ध्यान खींचा। इसमें उद्धव और राज ठाकरे को एक-दूसरे से गले मिलते हुए दिखाया गया है। पोस्ट में संदेश है- “बटेंगे तो कटेंगे, छोड़कर ठाकरे बंधु साथ आएं।” यह इशारा सिर्फ एक तस्वीर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नए सिरे से उम्मीदों का संचार हुआ है और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
इसी जगह महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की ओर से एक और पोस्टर लगाया गया, जिसमें तीखा संदेश लिखा गया है। पोस्ट में लिखा है- “हिंदी बीजेपी के लिए भक्ति नहीं, मजबूरी है। अगर आधा देश महाराष्ट्र में आकर अपना पेट पाल रहा है, तो महाराष्ट्र को हिंदी नहीं, मराठी सीखने की जरूरत है।” इस पोस्टर से साफ है कि MNS अब भी अपनी मराठी अस्मिता की राजनीति पर कायम है और वह अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं।
यदि राज और उद्धव ठाकरे के बीच यह संभावित मुलाकात हकीकत में बदलती है, तो यह न केवल महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला सकती है, बल्कि दशकों से दूर हुए ठाकरे परिवार के पुनर्मिलन का एक भावनात्मक क्षण भी बन सकती है। साथ ही, यह समीकरण विपक्षी दलों के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर सकता है।





