नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में लगातार उड़ानें रद्द होने और देरी के कारण मचे हाहाकार ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार (5 दिसंबर 2025) को केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि इंडिगो का संकट सरकार के ‘मोनोपॉली मॉडल’ का परिणाम है।राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अखबार में छपे लेख को साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए।
इंडिगो संकट ‘मोनोपॉली मॉडल’ की कीमत
राहुल गांधी ने इंडिगो विवाद को सीधे केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों से जोड़ते हुए लिखा, इंडिगो फियास्को इस सरकार के मोनोपॉली मॉडल की कीमत है। फिर से आम भारतीयों को देरी, कैंसिलेशन और बेबसी का सामना करना पड़ रहा है। भारत को हर सेक्टर में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा चाहिए, न कि मैच-फिक्सिंग जैसी मोनोपॉली। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को हर सेक्टर में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की जरूरत है।
कारोबारी समुदाय ‘फोन पर बात करने से भी डरते हैं’
राहुल गांधी ने अपने लेख के माध्यम से भारत के कारोबारी समुदाय के बीच व्याप्त ‘भय’ की समस्या उजागर की है। उन्होंने कहा कि देश आज ऐसे मोड़ पर है जहां उसे भय और स्वतंत्र व्यवसायिक माहौल में से किसी एक का चुनाव करना होगा।उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, भारत के कारोबारी समुदाय वे तो फोन पर बात करने से भी डरते हैं। डरते हैं कि कोई मोनोपॉली समूह और सरकार मिलकर उनके सेक्टर में घुस न जाए। और इसी के साथ राहुल गांधी ने इस डर के पीछे के कारणों को उजागर करते हुए खामिंया भी गिनाएं।
उन्होंने कहा कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी भारत को ताकत से नहीं, बल्कि मोनोपॉली और दबाव की नीति से चुप कराया था, और आज वैसा ही माहौल कुछ बड़े उद्योगपतियों ने पैदा कर दिया है, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ रही है। कांग्रेस सांसद ने मांग की कि सरकार को किसी एक व्यवसाय को दूसरों की कीमत पर बढ़ावा नहीं देना चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसियों का प्रयोग डराने या दबाव डालने के लिए नहीं होना चाहिए।बैंकों को केवल 100 बड़े उधारकर्ताओं पर निर्भर रहने के बजाय प्ले फेयर बिजनेस को भी समर्थन देना चाहिए।
राहुल गांधी ने कुछ ईमानदारी से काम करने वाले उद्योगपतियों और कंपनियों का उदाहरण भी दिया और कहा कि, उनकी सफलता साबित करती है कि भारत में बिना मोनोपॉली यानी एक आर्थिक और व्यापारिक अवधारणा, जिसका अर्थ है किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन और बिक्री पर एक ही कंपनी या व्यक्ति का पूर्ण नियंत्रण इसके भी शानदार सफलता संभव है। उन्होंने अंत में कहा कि, बदलाव का इंतजार न करें, कारोबारी समुदाय ही वह बदलाव है जो देश में रोजगार और विकास लाए।





