नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। संसद सत्र के दौरान आज भी लोकसभा में नवनिर्वाचित सांसदों को सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई गई। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने अपने पदों की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह में कुछ सांसदों की शपथ पर जमकर हंगामा हुआ। इसके साथ ही कुछ सांसदों के शपथ पर जमकर मेज थपथपाई गई। आज 18वीं लोकसभा की कार्यवाही के दूसरे दिन कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी शपथ ली। शपथ के दौरान दोनों लोगों के हाथ में संविधान की प्रति देखने को मिली।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव संविधान की एक प्रति के साथ ली शपथ
आपको बता दें कि 18वीं लोकसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन आज मंगलवार को भी नवनिर्वाचित सांसदों के शपथ लेने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा सांसद अखिलेश यादव ने लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। अपने शपथ के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव संविधान की एक प्रति को अपने साथ लेकर पहुंचे थे। इस दौरान उन लोगों ने संविधान की प्रति को सत्ता पक्ष की ओर दिखाया और लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। राहुल गांधी ने लाल और अखिलेश यादव नीले रंग की संविधान की प्रति लेकर शपथ ली थी।
मैं, राहुल गांधी, लोक सभा का सदस्य…
शपथ ग्रहण के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि मैं, राहुल गांधी, लोक सभा का सदस्य निर्वाचित होकर सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हू कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की संप्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा। मैं जिस दायित्व को ग्रहण करने वाला हूं, उसका निष्ठापूर्वक निर्वहन करूंगा। राहुल गांधी ने शपथ लेने के बाद जय हिंद और जय संविधान का नारा लगाया। इसके कुछ देर बाद अखिलेश यादव भी संविधान की नीते रंग की प्रति लेकर शपथ लेने पोडियम पर आए। अखिलेश यादव कन्नौज से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। अखिलेश यादव के साथ उनकी पार्टी के अन्य सांसदों ने भी लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली।
शपथ लेने का बाद वापस ‘चेयर’ की तरफ गए राहुल
हालांकि, राहुल गांधी से शपथ लेने के बाद एक भूल हो गई। शपथ लेने के बाद राहुल गांधी सीधे अपनी कुर्सी की तरफ बढ़ने लगें। इस दौरान उनकी कुर्सी पास बैठे अन्य सांसदों ने उन्हें कुछ इशारा किया। उसके बाद राहुल गांधी को अपने भूल का अहसास हुआ, और वो पीठासीन अधिकारी के पास गए और उनसे हाथ मिलाया। इसके बाद राहुल गांधी ने पीठासीन अधिकारी की कुर्सी के पीछे खड़े अधिकारी से भी हाथ मिलाया।
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