नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने विदेश यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशिया ट्रिप के दौरान राहुल गांधी ने येलोबुक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया। इस मामले में सीआरपीएफ ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर जानकारी दी है।
क्या है येलोबुक प्रोटोकॉल?
गृह मंत्रालय द्वारा जारी येलोबुक प्रोटोकॉल में वीवीआईपी सुरक्षा से जुड़े नियम लिखे होते हैं। इसमें बताया गया है कि यात्रा से पहले सुरक्षा एजेंसी को सूचना देना जरूरी है। विदेश यात्रा के लिए कम से कम 15 दिन पहले जानकारी देनी पड़ती है। इससे सुरक्षा एजेंसियां पहले से तैयारी कर सकें और खतरे को टाला जा सके।
राहुल गांधी को मिलती है Z+ सुरक्षा
राहुल गांधी को Z+ (ASL) श्रेणी की सुरक्षा मिलती है। इसके तहत 10–12 CRPF कमांडो हमेशा उनके साथ रहते हैं। इसके अलावा, यात्रा शुरू होने से पहले टीम उस जगह का निरीक्षण भी करती है। लेकिन आरोप है कि राहुल गांधी कई बार बिना पूर्व सूचना विदेश यात्रा पर चले जाते हैं।
क्या केस दर्ज हो सकता है?
अगर कोई वीवीआईपी येलोबुक प्रोटोकॉल तोड़ता है, तो यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं बल्कि कई बार कानूनी अपराध भी माना जाता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 और 132 के तहत इसे सरकारी आदेश की अवहेलना और लोक सेवक के काम में बाधा डालना माना जा सकता है। ऐसे में केस दर्ज करने का रास्ता खुल जाता है।
CRPF का अधिकार कहां तक है?
सीआरपीएफ खुद सीधे FIR दर्ज नहीं करा सकती। लेकिन अगर कोई उल्लंघन होता है तो वह स्थानीय पुलिस या संबंधित एजेंसी को लिखित शिकायत भेजती है। इसके बाद पुलिस FIR दर्ज करती है और जांच करती है। अगर गलती किसी सीआरपीएफ जवान से हुई है तो बल अंदरूनी कार्रवाई करता है। लेकिन अगर गलती किसी नागरिक या वीवीआईपी से हुई है तो पुलिस केस दर्ज कर सकती है। राहुल गांधी पर लगे आरोप के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या उनके खिलाफ केस दर्ज होगा। नियम साफ कहते हैं कि प्रोटोकॉल तोड़ने पर कार्रवाई संभव है, लेकिन पहला कदम पुलिस की ओर से उठाया जाना जरूरी है।




