नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार सरकार ने राबड़ी देवी को पटना के 10 Circular Road, Patna स्थित सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया है। यह सरकारी आवास वर्षों से राबड़ी देवी या उनके परिवार के इस्तेमाल में था लगभग 20 साल तक। हालांकि, खाली कराने के साथ सरकार ने राबड़ी देवी के लिए नया आवास भी आवंटित किया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया – बदले की राजनीति और आलोचना
कांग्रेस के पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने इस फैसले पर तीखा मुताबिक़ किया। उन्होंने कहा, जब सरकार बदले की भावना से चल रही हो, तो कुछ भी हो सकता है। इस देश में बीजेपी के काल में कभी भी कुछ भी हो सकता है। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं की इज्जत-मर्यादा का ख्याल मौजूदा सरकार को रहता है या नहीं यह सवाल उठता है। कांग्रेस इस कदम को बदले की राजनीति कह रही है, जो सत्ता में आने के बाद पुराने विरोधी नेताओं को निशाना बना रही है।
सरकार का पक्ष नियम के अनुसार कार्य
सरकारी प्रशासन का कहना है कि यह फैसला “नियमों और प्रक्रिया” के तहत लिया गया है। जब नई सरकार बनी है, तो सरकारी आवासों का पुनः आबंटन एक आम प्रक्रिया है। मंत्री और बीजेपी के नेता मीडिया से कहते रहे कि जो भी सार्वजनिक बंगले थे उन्हें उनके अधिकार, पद या श्रेणी के अनुसार आवंटित करना पड़ता है। राबड़ी देवी के लिए नया बंगला देना, प्रशासन की माने तो, एक निर्धारित फॉर्मूला है इसलिए कहीं अनियमितता नहीं है।
राजनीति और भावनात्मक जुड़ाव दोनों का
10 Circular Road बंगला परिवार के लिए सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि दशकों पुरानी राजनीतिक और पारिवारिक यादों का हिस्सा रहा है। इसलिए बंगला खाली करने का आदेश सिर्फ निवासी स्थान बदलने जैसा नहीं, बल्कि उस पहचान और इतिहास को छीनने जैसा माना जा रहा है। विपक्ष इस फैसले को प्रतीकात्मक राजनीतिक हमला बता रहा है। दूसरी ओर, सरकार यह कहना चाहती है कि यह सब नियम और सही प्रक्रिया के अंतर्गत हुआ है इसलिए इसे एक प्रशासनिक कदम के रूप में देखना चाहिए। इस मामले में, हालात साधारण नहीं हैं यह सिर्फ बंगला खाली करना नहीं है, बल्कि सत्ता-परिवर्तन, राजनीतिक संदेश और पहचान से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। अगर आप नियम और प्रक्रिया की भाषा देखें तो सरकार का कदम वैध और औपचारिक है। लेकिन सम्मान और पहचान की दृष्टि से पूर्व CM और उनके परिवार के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण था, इसलिए इसे राजनीतिक प्रतिशोध जैसा भी माना जा रहा है। अगर आप चाहें मैं बता सकता हूँ कि अब तक इस फैसले के बाद विरोधियों और समर्थकों की क्या प्रतिक्रियाएँ आई हैं, और आगे आगे क्या हलचल हो सकती है।





