नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पानी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए एक भी बूंद अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने ये बयान पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी पंजाब और इसके लोगों के लिए भावनात्मक और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है और सरकार हर कीमत पर राज्य के जल स्रोतों की रक्षा करेगी।
इंडस वॉटर ट्रीटी को रोकने की मांग
भगवंत मान ने केंद्र सरकार से इंडस वॉटर ट्रीटी (Indus Water Treaty) को रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर इस संधि को रोका गया तो पंजाब को पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम, चिनाब – का पानी मिल सकता है, जिससे राज्य को 23 मिलियन एकड़ फीट अतिरिक्त पानी मिलेगा। यह पानी पंजाब के किसानों और नागरिकों की जरूरतें पूरी करने में मदद करेगा। मान ने यह भी कहा कि भाखड़ा और पोंग डैम के ऊपर नए जलाशय बनाने की जरूरत है ताकि पानी को संरक्षित किया जा सके।
1955 से नहीं हुआ जल विवाद का पुनर्मूल्यांकन
CM मान ने भाखड़ा-नंगल डैम पर CISF की तैनाती का विरोध किया और कहा कि पंजाब के जल विवाद की शुरुआत 1955 में हुई थी, लेकिन तब से आज तक इसका कोई नया मूल्यांकन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि देश में हर 25 साल में जल वितरण का दोबारा आंकलन होना चाहिए, लेकिन पंजाब के साथ ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने देश को अन्न में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपनी जल और भूमि जैसी संसाधनों का भरपूर उपयोग किया, लेकिन इसके बदले उचित मुआवज़ा नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने पंजाब के जल संसाधनों को लूटने में भूमिका निभाई है और पिछले 60 सालों से जनता को भ्रमित कर रहे हैं।
सतलुज-यमुना लिंक (SYL) पर भी तीखा हमला
भगवंत मान ने SYL नहर को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता खुद इस विवादित नहर की नींव में शामिल रहे हैं और अब जनता को गुमराह कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पंजाबी भाषा का ज्ञान भी नहीं है और कांग्रेस के नेता जनता के सामने आने से बचने के लिए बहाने बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा पंजाब की 3.5 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करती है और सेवा वही कर सकता है जिसे जनता चुनती है। मुख्यमंत्री ने बीजेपी और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये पार्टियां देश को भाषा, धर्म और क्षेत्र के आधार पर बांटने की राजनीति करती हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये पार्टियां अपनी विभाजनकारी राजनीति छोड़ दें, तो देश हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह बयान पंजाब में पानी के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ले आया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और इंडस वॉटर ट्रीटी को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।





