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कोरोना के खिलाफ लड़ाई में तकनीक और ढांचागत व्यवस्था मुहैया करायें तकनीकी शिक्षण संस्थान : निशंक

नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आईआईटी और एनआईटी आदि तकनीकी शिक्षण संस्थाओं से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय प्रशासन का तकनीकी और ढांचागत व्यवस्थाओं के माध्यम से सहयोग करने का आह्वान किया है। केंद्रीय मंत्री निशंक गुरुवार को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए देश भर के आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, आईआईएससी जैसे तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के निदेशकों के साथ उनके संस्थानों में कोविड प्रबंधन, ऑनलाइन शिक्षा एवं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने इनोवेटिव विचारों और समाधानों के साथ आगे आएं ताकि महामारी के खिलाफ लड़ाई में विजय प्राप्त की जा सके। पोखरियाल ने सभी शिक्षण संस्थानों के निदेशकों से कहा कि आज देश में कोरोना से लड़ने के लिए हर व्यक्ति, संस्थान और सामाजिक वर्ग को आगे आकर अपना योगदान देना होगा और इसकी शुरुआत हम व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर कर सकते हैं। उन्होनें कहा, "आप सभी संस्थान स्थानीय प्रशासन के सम्पर्क में बने रहें और उन्हें जो भी सहयोग आप दे सकते हैं, वह दें जैसे कि आप सभी के पास छात्रावास सुविधाएं है जिन्हें अस्थायी तौर पर आइसोलेशन केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त आप सभी अपने तकनीक और डाटा मैनेजमेंट के कक्ष से स्थानीय प्रशासन को ऑनलाइन समाधान दे सकते हैं जिससे जमीनी स्तर पर चीजों को व्यवस्थित किया जा सके।" निशंक ने संस्थानों के प्रमुखों से कहा कि महामारी ने हमारे प्रियजनों एवं मित्रों को छीन लिया है लेकिन अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, आईआईएससी के छात्रावासों में रह रहे 21,360 विद्यार्थियों की सुरक्षा, वायरस का रोकथाम और परिसरों को कोविड मुक्त बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। महामारी के दौरान सभी तकनीकी शिक्षण संस्थानों द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों की प्रशंसा करते हुए निशंक ने कहा कि कोविड से लड़ने के लिए लॉकडाउन की अवधि के दौरान प्रतिष्ठित संस्थानों ने कम लागत वाले पोर्टेबल वेंटिलेटर, सस्ती कोविड टेस्ट किट, सैनिटाइजेशन के लिए ड्रोन, विशेषीकृत डिजिटल स्टेथोस्कोप, मेक-शिफ्ट आइसोलेशन वार्डों के लिए डिस्पोजेबल बांस-फर्नीचर और "संक्रमण प्रूफ फैब्रिक" का निर्माण किया है।" इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में चर्चा करते हुए सभी से कहा कि कोरोना की दूसरी लहर ने भारत को बुरी तरह प्रभावित किया है लेकिन इसकी वजह से हमें छात्र-कल्याण के कार्यों से पीछे नहीं हटना है और यह सुनिश्चित करना होगा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन का काम तय समय सीमा में पूरा हो जाए। हिन्दुस्थान समाचार/सुशील

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