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Wednesday, March 11, 2026
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बढ़ते साइबर अपराध पर राष्ट्रपति ने जताई चिंता, कहा- भारत को आतंकवाद, साइबर युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए

यह कथन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का है। वे तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में एक समारोह में बोल रही थीं।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क। भारत को तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में साइबर युद्ध और आतंकवाद जैसी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों सहित किसी भी परिदृश्य का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह कहना है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का। वे तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में एक समारोह में बोल रही थीं। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय और वैश्विक स्थिति की गहरी समझ की आवश्यकता पर भी जोर दिया क्योंकि उनके अनुसार भू-राजनीतिक गतिशीलता ने सुरक्षा परिदृश्य को बदल दिया है। 

चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए


राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन का मुद्दा नया आयाम ले रहा है और इसे समझने और प्रबंधित करने की जरूरत है, उसके लिए नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। हमारा मानना ​​है कि हमारे सशस्त्र बलों के अधिकारी भविष्य की बढ़ती चुनौतियों का सक्षमता से सामना करेंगे। तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में हमें किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 

चूंकि भू-राजनीतिक गतिशीलता के कारण सुरक्षा परिदृश्य बदल गया है, इसलिए राष्ट्रीय और वैश्विक स्थिति को गहराई से समझने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी चाहिए बल्कि साइबर युद्ध, आतंकवाद जैसी नई राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।’

“देश में रक्षा उद्योग तेजी से बदलती तकनीक को अपना रहा”


राष्ट्रपति का कहना रहा कि देश में रक्षा उद्योग तेजी से बदलती तकनीक को अपना रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के अनुरूप कदम उठा रहा है। देश के रक्षा उद्योग दुनिया के 100 से अधिक देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहे हैं। पिछले दशक में रक्षा उद्योग 30 गुना बढ़ गया है और मेक इन इंडिया पहल ने इसमें बहुत योगदान दिया है। उन्होंने कहा, भारत उभर रहा है और दुनिया ने रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में हमारे देश की भूमिका को पहचाना है। 

देश सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने और चुनौतियों से पार पाने के लिए आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रहा है। भारत एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है और एक विश्वसनीय रक्षा भागीदार और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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