नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) प्रमुख मोहन भागवत के “घर वापसी” वाले बयान से पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक हंगामा मच गया है। उन्होंने कहा था कि भारतीय मुसलमानों को अपनी मूल संस्कृति और धर्म में लौटने की ज़रूरत है, जिसे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना ने कहा था।अरशद मदनी ने कड़ा विरोध जताया है। मदनी ने अपने बयान में इसे देश में नफरत और सांप्रदायिकता फैलाने वाला कदम करार दिया और कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही ऐसी सोच के खिलाफ रही है और हमेशा रहेगी।
गाय के नाम पर निर्दोष लोगों को मारा जा रहा है
मौलाना मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि 20 करोड़ मुसलमानों की ‘घर वापसी’ की बातें करना न केवल अव्यावहारिक हैं बल्कि यह देश में आपसी दुश्मनी और बर्बादी की ओर धकेलने वाला बयान है। उन्होंने कहा कि जो आवाज देश को तबाही और आपसी नफरत की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी नहीं दिखाती। मदनी ने यह भी कहा कि देश में नफरत की आग भड़काई जा रही है और दिनदहाड़े लिंचिंग जैसी घटनाएं हो रही हैं। गाय के नाम पर निर्दोष लोगों को मारा जा रहा है और सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है।
मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए-मौलाना
मौलाना ने आगे कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी धर्म प्रेम, मानवता और एकता का संदेश देते हैं, और जो लोग धर्म का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए करते हैं, वे कभी अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म के प्रति वफादार रहेंगे। मदनी ने जोर देकर कहा कि मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, लेकिन इस्लाम और उसकी शिक्षाएं हमेशा जिंदा रहेंगी।
संविधान संरक्षण में ही संभव है।
मौलाना अरशद मदनी ने यह भी कहा कि भारत में शांति, भाईचारा और सामाजिक समरसता केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान के संरक्षण में ही संभव है। उनका यह बयान संघ प्रमुख के बयान के खिलाफ स्पष्ट विरोध और देश में आपसी सद्भाव बनाए रखने की अपील के रूप में देखा जा रहा है।





