नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। शिव मंदिर विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी वार्षिक परंपरा को जारी रखते हुए 2 जनवरी 2024 को अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने वाले हैं। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को शाम छह बजे चादर सौंप दी जाएगी, जो इसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के दौरान दरगाह पर चढ़ाएंगे। इस बार ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का सलाना उर्स 28 दिसंबर 2024 से शुरू हो गया है।
इस बार पीएम मोदी परंपरा के अनुसार 11वीं बार चादर चढ़ाएंगे
प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी अजमेर शरीफ दरगाह पर 10 बार चादर चढ़ा चुके हैं। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परंपरा के अनुसार 11वीं बार ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती में चादर चढ़ाएंगे। पिछले वर्ष 812वें उर्स के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और जमाल सिद्दीकी तथा मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने चादर पेश की थी।
हिन्दू सेना की प्रधानमंत्री से चादर न चढाने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कदम राजस्थान की एक अदालत द्वारा हिंदू सेना की याचिका स्वीकार किए जाने के एक महीने बाद उठाया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि राजस्थान में स्थित अजमेर शरीफ दरगाह वास्तव में भगवान शिव का मंदिर है। वहीं हिन्दू सेना की तरफ से प्रधानमंत्री को गुहार लगाईं गई है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती में चादर न चढ़ाई जाए। हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने यह गुहार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगाईं है।
अजमेर शरीफ दरगाह पिछले वर्ष विवाद का विषय बन गई थी
अजमेर शरीफ दरगाह पिछले वर्ष विवाद का विषय बन गई थी, जब अजमेर की एक स्थानीय अदालत ने 27 नवंबर 2024 को एक सिविल मुकदमे में तीन पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया था, जिसमें दावा किया गया था कि मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के भीतर एक शिव मंदिर मौजूद है।
20 दिसंबर 2024 को अजमेर शरीफ दरगाह कमेटी ने अजमेर की मुंसिफ कोर्ट में 5 पेज का आवेदन दायर कर अजमेर दरगाह के नीचे मंदिर होने का आरोप लगाने वाली याचिका को खारिज करने की मांग की। अब इस मामले में अगली सुनवाई 24 जनवरी 2025 को होगी।





