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प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 पत्थर की लिखी लकीर नहीं, होना चाहिए फिर विचार- विहिप अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार

नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में किए गए सर्वे की रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हिंदू पक्ष वहां शिवलिंग मिलने का दावा करते हुए उसे मंदिर बता रहा है तो वहीं मुस्लिम पक्ष उसे फव्वारा। मुस्लिम पक्ष की तरफ से प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 ( पूजा स्थल कानून ) का भी हवाला दिया जा रहा है। वहीं वाराणसी के ज्ञानवापी के साथ-साथ मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद मामले को भी अदालत ने बहस के लिए स्वीकार कर लिया है। एक तरफ जहां अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य जोर-शोर से जारी है तो वहीं दूसरी तरफ काशी और मथुरा का विवाद भी लगातार गहराता जा रहा है। अयोध्या विवाद का समाधान अदालत के फैसले से हुआ था और काशी एवं मथुरा का मामला भी अब अदालत की चौखट पर पहुंच गया है लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों की तरफ से इस पर बयानबाजी लगातार जारी है। काशी और मथुरा के मामले में क्या समाधान निकल सकता है और समाधान निकालने का यह तरीका क्या हो सकता है? इस पूरे मामले में अदालत, सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा, मुस्लिम पक्ष और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका क्या होनी चाहिए, इन तमाम मुद्दों पर आईएएनएस के वरिष्ठ सहायक संपादक ने विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार से खास बातचीत की। सवाल - ज्ञानवापी सर्वे को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। हिंदू पक्ष इसे शिवलिंग बता रहा है तो वहीं मुस्लिम पक्ष फव्वारा। इन दावों पर आपकी क्या राय है ? जवाब - हमको लगता है कि वो फव्वारा नहीं शिवलिंग ही है और शिवलिंग इतना बड़ा है कि इस बात को मानने में कोई कठिनाई नहीं है कि वो मूल ज्योतिलिर्ंग है। स्वाभाविक है कि उसकी प्राण प्रतिष्ठा हुई होगी, पूजन हुआ होगा। इसलिए मेरा यह मानना है कि जितने हिस्से में शिवलिंग है, वो स्थान तो मंदिर ही है क्योंकि किसी मस्जिद में शिवलिंग तो नहीं होता है। मस्जिद बनने के बाद बाहर से तो कोई शिवलिंग नहीं आ सकता इसलिए यह तय है कि वो शिवलिंग पुरातन काल से वहां है। देश आजाद होने के समय ( 15 अगस्त 1947 ) को भी शिवलिंग वहीं था इसलिए इस पर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का प्रतिबंध लागू नहीं होता है। उस पूरे परिसर के शिवलिंग वाले भाग में हिंदुओं को पूजा करने का अधिकार मिलना ही चाहिए। सवाल - तो क्या विहिप शिवलिंग वाली जगह पर सिर्फ पूजा करने के अधिकार मिलने से ही संतुष्ट हो जाएगा ? जवाब - ये मुकदमा विहिप ने दायर नहीं किया है। लेकिन जहां तक प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का सवाल है, इस कानून को जल्दबाजी में बनाया गया, इस पर न तो समाज में कोई चर्चा हुई और न ही इसे संसद की सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया। उस समय भारतीय जनता पार्टी ने इस बिल का प्रखर विरोध किया था। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि इस कानून की वैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है जिस पर कोर्ट ने नोटिस भी जारी किया हुआ है। इसलिए यह कानून कोई पत्थर की लिखी लकीर नहीं है और इसके प्रावधानों पर पुन: विचार होना चाहिए। सवाल - पुनर्विचार किसे करना चाहिए - अदालत या सरकार को ? क्या आप भाजपा सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि वो संसद में कानून लाकर प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को रद्द कर दें या इसके प्रावधानों को बदल दें ? जवाब - अदालत तो कर ही रही है इसलिए उसने संबंधित पक्षों को नोटिस दिया है और जहां तक हमारे ( विहिप ) स्टैंड का सवाल है, यह आगामी दो महत्वपूर्ण बैठकों में चर्चा के बाद तय किया जाएगा। इसी महीने के अंत में कांची में हमारे बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक होने जा रही है। अगले महीने, 11 और 12 जून को हरिद्वार में हमारे मार्गदर्शक मंडल की भी बैठक होने जा रही है। इस बैठक में साधु-संतों के निर्देश और मार्गदर्शन में विहिप अपना स्टैंड निर्धारित करेगा और उसे लेकर भविष्य की कार्ययोजना भी। सवाल - विहिप के दिग्गज नेता रहे अशोक सिंघल कहा करते थे कि अगर मुस्लिम समाज शांति के साथ अयोध्या, काशी और मथुरा हिंदू समाज को सौंप दें तो देश में प्रेम, एकता और सौहार्द का माहौल छा जाएगा और फिर हिंदू समाज देश भर में फैले इस तरह के अन्य स्मारकों पर दावा नहीं जताएगा। अयोध्या का फैसला तो सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से हो गया। क्या मथुरा और काशी को लेकर आज भी विहिप का वही स्टैंड हैं जो अशोक सिंघल कहा करते थे? जवाब - देखिए अयोध्या में ऐसा नहीं हुआ, वहां तो अदालत के फैसले के जरिए ही मंदिर बन रहा है। अगर आज भी मुस्लिम समाज स्वयं आगे बढ़कर काशी और मथुरा हिंदुओं को सौंप देंगे तो इससे देश में सद्भावना का वातावरण बनेगा और उस समय इस पर विचार किया जा सकता है। लेकिन अगर मुस्लिम पक्ष की तरफ से उसी तरह की भाषा बोली जाती रहेगी जैसे ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोल रहा है तो उससे सद्भावना जैसा माहौल नहीं बनेगा। आजकल के सारे वातावरण से यह स्पष्ट हो रहा है कि काशी और मथुरा पूरे हिंदू समाज के मन की बात है। विहिप ने तो पहले कहा था कि हम राम मंदिर बनने तक इन दोनों पर विचार नहीं करेंगे लेकिन घटनाएं तो बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। इस पर हम अपनी आगामी बैठकों में चर्चा करेंगे। सवाल - आपने विहिप के संकल्प और घटनाओं के तेजी से आगे बढ़ने की बात कही। कुछ इसी तरह की हालत भाजपा और आरएसएस की भी है। संघ प्रमुख मोहन भागवत 2019 में ही कह चुके हैं कि ऐतिहासिक कारणों की वजह से संघ राममंदिर आंदोलन से जुड़ा था और यह अपवाद के तौर पर ही था। वहीं भाजपा 1989 के पालमपुर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कह रही है कि उन्होंने सिर्फ आपके रामजन्मभूमि आंदोलन का खुल कर समर्थन करने का फैसला किया था। हालांकि संघ के वरिष्ठ नेता सुनील आंबेकर ने ज्ञानवापी मसले पर हाल ही में यह कहा है कि तथ्यों को अधिक समय तक छिपाया नहीं जा सकता और इस मामले में तथ्यों को सामने आने देना चाहिए। क्या इस बार भी रामजन्मभूमि आंदोलन की तरह संघ, भाजपा और विहिप के एक साथ मिलकर आंदोलन चलाने जैसे हालात बनते जा रहे हैं? जवाब - संघ अपना निर्णय स्वयं करेगा, भाजपा अपना निर्णय स्वयं करेगा लेकिन सारे देश की भावना एक ही है कि यह एक ऐतिहासिक अन्याय है और इसे दुरुस्त करने की ओर बढ़े तो अच्छा रहेगा। सवाल - विवाद का समाधान कैसे होगा ? जवाब - दोनों मामले अदालत के विचाराधीन हैं और अदालत से ही समाधान का रास्ता निकलेगा। इस देश ने अदालतों का सम्मान करना सीख लिया है। ओवैसी जैसे लोग रामजन्मभूमि के फैसले के समय भी सिंह गर्जनाएं कर रहे थे लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। जब सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या को लेकर फैसला आया तो हिंदू और मुस्लिम दोनों समाजों ने उसे स्वीकार कर लिया, न कहीं हिंसा हुई और न कहीं दंगा हुआ। इसलिए काशी और मथुरा को लेकर अदालत जब फैसला करेगी तो सभी इसे स्वीकार कर लेंगे, ऐसी मैं उम्मीद करता हूं। सवाल - आपने असदुद्दीन ओवैसी के बयान का जिक्र किया। अखिलेश यादव और कांग्रेस नेताओं के बयान भी आपने सुने होंगे ? जवाब - अखिलेश यादव को दो बार उत्तर प्रदेश की जनता खारिज कर चुकी है। कांग्रेस नेता ने बीच में अपना गोत्र बताया था और जनेऊ भी दिखाया था लेकिन अधूरे मन से और कभी कभार यह करने से कुछ नहीं होगा। हिंदुत्व का सम्मान करना है तो हर समय करना होगा। हिंदू समाज और उनकी भावनाओं का निरंतर अनादर करने वाले अपने आपको जनता से दूर करते जा रहे हैं। जनता इन सबको देख रही है और समय आने पर फिर इसका उत्तर देगी। सवाल - महबूबा मुफ्ती ने तो यह कहा है कि आप लोग एक ही बार पूरी लिस्ट दे दीजिए ? जवाब - उन्होंने कटाक्ष किया है। सभी राजनीतिक दलों को अपनी-अपनी पोजिशनिंग के हिसाब से कुछ व कुछ बोलना पड़ता है। लेकिन वहां शिवलिंग मिलने से बहुत सी बातों का उत्तर मिल गया है। सत्य वास्तव में सर चढ़कर बोल रहा है। सवाल - आखिरी सवाल, क्या रामजन्मभूमि आंदोलन की तरह विहिप , काशी और मथुरा को लेकर भी जनांदोलन चलाएगा, सड़कों पर उतरेगा, सरकार पर दवाब डालेगा या कानूनी लड़ाई लड़ेगा ? जवाब - मैं आपको पहले ही यह बता चुका हूं कि विहिप इस महीने के अंत में कांची में होने वाले बोर्ड ऑफ ट्रस्टी और अगले महीने, 11 और 12 जून को हरिद्वार में होने वाले मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इन सभी मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लेगा। --आईएएनएस एसटीपी/एएनएम

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