back to top
24.1 C
New Delhi
Thursday, April 2, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

एजीआर कैलकुलेशन में सुधार की मांग वाली टेलीकॉम कंपनियों की याचिका खारिज (लीड-1)

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा झटका देते हुए एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) कैलकुलेशन में कथित त्रुटियों को ठीक करने की उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सभी आवेदन खारिज कर दिए गए। सोमवार को, शीर्ष अदालत ने पहले ही कहा कि वह वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेली सर्विसेज लिमिटेड द्वारा दायर आवेदनों पर अपना आदेश पारित करेगी। कंपनियों ने उनके द्वारा देय एजीआर बकाया की गणना में अंकगणितीय त्रुटियों का आरोप लगाया था। शीर्ष अदालत ने मामले में पहले के एक आदेश का हवाला देते हुए आदेश को स्पष्ट रूप से इंगित किया था कि एजीआर से संबंधित बकाया का कोई पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है। दूरसंचार कंपनियों ने प्रस्तुत किया कि अंकगणितीय त्रुटियों को ठीक किया जा सकता है और प्रविष्टियों के दोहराव के मामले हैं। वोडाफोन आइडिया का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने प्रस्तुत किया था कि वे इसके लिए दूरसंचार विभाग (डीओटी) को दोष नहीं दे रहे हैं, ये अंकगणितीय प्रविष्टियां हैं। रोहतगी ने कहा कि वे इन त्रुटियों को सुधार के लिए संबंधित विभाग के ध्यान में लाना चाहते हैं। पीठ ने दोहराया कि शीर्ष अदालत के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया था कि कोई पुनर्मूल्यांकन नहीं हो सकता है। रोहतगी ने जवाब दिया कि आंकड़े पत्थर में नहीं डाले गए हैं । उनका कहना था, ट्रिब्यूनल के पास समीक्षा की शक्ति नहीं है, लेकिन वे अंकगणितीय त्रुटियों को ठीक कर सकते हैं। उन्होंने प्रस्तुत किया कि वे समय के विस्तार की मांग नहीं कर रहे हैं। टाटा टेली सर्विसेज लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने प्रस्तुत किया कि गणना में त्रुटियों का सुधार किया जा सकता है। केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रस्तुत किया कि उन्हें त्रुटियों के सुधार की अनुमति देने के लिए डीओटी से कोई निर्देश नहीं मिला है। पीठ ने कहा था कि उसने सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दो-तीन बार कहा है कि एजीआर की मांग की पुनर्गणना नहीं की जा सकती। एयरटेल का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी ने कहा कि दोहराव और भुगतान के भी मामले हैं, लेकिन इसका कोई हिसाब नहीं है। उन्होंने प्रस्तुत किया, मैं इन त्रुटियों के कारण हजारों करोड़ का भुगतान नहीं करना चाहता। मेहता ने कहा कि वह दो दिनों के भीतर इस पर निर्देश ले सकते हैं। मेहता ने कहा, निर्देश के बिना बयान देना मेरे लिए थोड़ा खतरनाक हो सकता है। पिछले साल सितंबर में, शीर्ष अदालत ने दूरसंचार कंपनियों को 10 साल का समय दिया था, जो सरकार को बकाया एजीआर बकाया राशि में 93,520 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। शीर्ष अदालत ने कहा था कि दूरसंचार ऑपरेटरों को 31 मार्च, 2021 तक दूरसंचार विभाग द्वारा मांगे गए कुल बकाया का 10 प्रतिशत का भुगतान करना होगा। पीठ ने कहा था कि शेष राशि का भुगतान 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च, 2031 से शुरू होने वाली वार्षिक किश्तों में किया जाना है। –आईएएनएस आरएचए/आरजेएस

Advertisementspot_img

Also Read:

हर महीने बस 5 हजार निवेश करें और पाएं लाखों का फंड, देखें 20 साल का कैलकुलेशन

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। घरेलू शेयर बाजार में इन दिनों जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार को दोपहर 2:30 बजे तक सेंसेक्स 1000...
spot_img

Latest Stories

⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵