नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी के नेता कबीर शंकर बोस पर कथित मारपीट और यौन उत्पीड़न मामलें में अब सीबीआई जांच करेंगी। सुप्रीम कोर्ट में CBI जांच की मांग के लिए रिट पीटिशन दायर की गई थी जिसे शीर्ष अदालत ने मंजूरी दे दी है।
शंकर बोस पर मारपीट और यौन उत्पीड़न का आरोप
कबीर शंकर बोस पर दिसंबर 2020 में मारपीट और यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था । मामले की जांच राज्य पुलिस कर रही थी, लेकिन पीडि़त पक्ष सीबीआई जांच की मांग कर रहा था। कबीर शंकर बोस पर दर्ज किए गए मामलों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कार्यकर्ताओं पर हमला और छेड़छाड़ के आरोप शामिल हैं।
याचिका को मंजूरी देते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने शंकर बोस द्वारा दायर रिट याचिका पर फैसला सुनाया गया, बोस ने कहा कि, उनके खिलाफ एक राजनीतिक साजिश की गई और उसे फंसाने की कोशिश हुई है,उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण झूठे आपराधिक आरोप लगाए गए।
जस्टिस मिथल ने फैसले का ऑपरेटिव हिस्सा सुनाया, दिसंबर कथित हमले में दर्ज केस में आरोप लगया गया कि, बोस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं पर हमला किया ।
जांच के कागजात CBI को सौंपने के आदेश
जस्टिस मिथल ने कहा, उपरोक्त सभी कारणों और इस मामले के सबूत को देखते प्रतिवादियों को FIR के अनुसार जांच के कागजात CBI को सौंपने के लिए एक रिट जारी की जाती है, जिससे यदि आवश्यक हो तो मुकदमा शुरू हो सके और पक्षों को न्याय मिल सके। जनवरी 2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने बोस के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, जब CISF ने एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें पुष्टि की गई थी कि वह कथित अपराधों के स्थान पर नहीं थे।
सांसद कल्याण बनर्जी पर बड़ा आरोप
कबीर बोस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि इस मामले की साजिश वरिष्ठ टीएमसी नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने रची और वह उनके पूर्व ससुर भी है, बोस ने कहा- 2015 में बनर्जी की बेटी के साथ अपनी शादी को रद्द करने और बाद में भाजपा में शामिल होने के फैसले से नाराज थे और उन्हीं बात को लेकर वें दुश्मनी निकालना चाहते है। इसलिए बनर्जी ने मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित होकर मेरे खिलाफ झूठ आपराधिक आरोप लगाए है। वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और अधिवक्ता सुरजेंदु शंकर दास बोस की ओर से शीर्ष अदालत में पेश हुए।





