नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पर घटिया गुणवत्ता का गाय का घी बेचने का आरोप लगा है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पतंजलि घी के सैंपल फेल होने के बाद, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट ने घी के निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया है। हालांकि, पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने इस आदेश को त्रुटिपूर्ण और विधि-विरुद्ध बताते हुए अपनी ओर से स्पष्टीकरण जारी किया है।
पिथौरागढ़ के सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त आरके शर्मा ने बताया कि अक्टूबर 2020 में घी के सैंपल एकत्र किए गए थे और उन्हें रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया, जहाँ सैंपल फेल हो गए। इसके बाद व्यापारियों के अनुरोध पर सितंबर 2021 में केंद्र सरकार की प्रयोगशाला से दोबारा टेस्ट कराया गया, जिसने 2022 में भी सैंपलों को फेल घोषित कर दिया। शर्मा के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 46/4 के तहत तीनों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में मामला दर्ज किया गया था, जिसने 19 नवंबर को फैसला सुनाया और निर्माता पर ₹1.25 लाख तथा वितरक व खुदरा विक्रेता पर ₹15,000 का जुर्माना लगाया।
पतंजलि का कड़ा विरोध और मुख्य तर्क
कोर्ट के आदेश के बाद पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर स्पष्टीकरण जारी किया। कंपनी ने कहा कि यह आदेश कई कारणों से त्रुटिपूर्ण और विधि-विरुद्ध है। पतंजलि का मुख्य तर्क है कि रेफरल प्रयोगशाला (Referral Laboratory) को NABL से गाय के घी के परीक्षण के लिए मान्यता प्राप्त नहीं थी, इसलिए वहाँ किया गया परीक्षण कानून की दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। कंपनी ने इसे ‘हास्यास्पद और घोर आपत्तिजनक’ बताया कि एक सब-स्टैंडर्ड लैब ने पतंजलि के सर्वश्रेष्ठ गाय के घी को सब-स्टैंडर्ड घोषित किया। कंपनी ने दावा किया कि जिन पैरामीटरों के आधार पर नमूना असफल घोषित किया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे, इसलिए उनका प्रयोग विधिक रूप से गलत है। पतंजलि ने बताया कि दोबारा परीक्षण सैंपल की एक्सपायरी डेट बीत जाने के बाद किया गया था, जो कानून के अनुसार अमान्य है।
कंपनी ने कहा कि, कोर्ट ने इन सभी प्रमुख तर्कों पर विचार किए बिना प्रतिकूल आदेश पारित किया है, जो विधि की दृष्टि से सही नहीं है। पतंजलि ने विश्वास जताया है कि इस आदेश के विरुद्ध फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील दायर की जा रही है, और ट्राइब्यूनल के समक्ष यह मामला उनके पक्ष में निर्णयित होगा।
घी की गुणवत्ता पर सफाई
पतंजलि ने आगे स्पष्ट किया कि इस फैसले में कहीं भी घी को ‘उपयोग के लिए हानिकारक’ नहीं बताया गया है। इसमें केवल RM Value (जो घी में वाष्पशील फैटी एसिड का स्तर बताता है) के मानक से नाम-मात्र का अंतर पाया गया है। कंपनी का कहना है कि यह RM Value पशुओं के आहार और जलवायु के आधार पर क्षेत्रीय स्तर पर भिन्न-भिन्न होता है, और सरकारी नियामक संस्था FSSAI भी इस मानक को बदलती रहती है। पतंजलि ने कहा कि RM Value में इस प्राकृतिक अंतर से घी की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं होता, और वह पूरे देश से कड़े मानदंडों के आधार पर घी एकत्र करके विक्रय करती है।





