नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । उत्तराखण्ड में होने वाले पंचायत चुनाव में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। मामला आरक्षण की वजह से प्रक्रिया में है। नैनीताल हाईकोर्ट की रोक के बाद अब फिर से आरक्षण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक, नैनीताल हाईकोर्ट ने मंगलवार तक उत्तराखंड में चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
बताते चलें कि, उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अधिसूचना तक जारी कर दी गई थी। जहां 25 जून से नामांकन प्रक्रिया होने की घोषणा की गई थी। इसके बाद आचार संहिता भी लागू हो गई थी। इन सभी तैयारियों के बीच नैनीताल हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दिया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने रिजर्वेशन पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से रोक लगाई है।
नए आरक्षण रोटेशन को बताया गलत
बता दें, आरक्षण रोटेशन को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में पंचायत चुनाव के लिए लागू नए आरक्षण रोटेशन को गलत बताया। याचिका में बताया गया कि, सरकार ने तीन बार से आरक्षित सीट को फिर कर दिया आरक्षित, चौथी बार भी आम जनता को मौका हीं मिल रहा है।
याचिका में क्या है?
इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट ने इस संदर्भ में राज्य सरकार से जवाब मांगा। खुद सरकार ने कोर्ट से 24 जून तक का समय मांगा। लेकिन उससे पहले ही चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो किस आधार पर चुनाव का कार्यक्रम घोषित हुआ।
याचिका में कहा गया कि सरकार ने 9 जून 2025 को एक आदेश जारी कर पंचायत चुनाव के लिए नई नियमावली बनाई थी। साथ ही 11 जून को आदेश जारी कर अब तक पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोटेशन को शून्य घोषित करते हुए इस वर्ष से नया रोटेशन लागू करने का निर्णय लिया है।
जबकि, न्यायालय ने पहले से ही इस मामले में दिशा-निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस आदेश से पिछले तीन कार्यकाल से जो सीट आरक्षित वर्ग में थी वह चौथी बार भी आरक्षित कर दी गई।
मामले में सरकार से जवाब मांगा
सरकार के द्वारा कहा गया कि इसी तरह के कुछ मामले एकलपीठ में भी दायर हैं, जबकि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने खण्डपीठ में 9 जून को जारी नियमों को भी चुनौती दी है। एकलपीठ के समक्ष, 11 जून के आदेश को अब नए सिरे से आरक्षण लागू करने को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस मामले में सरकार से जबाव मांगा है।





