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झारखंड में गायिका सुनिधि चौहान के कार्यक्रम और टी-शर्ट व टॉफी वितरण में घोटाले की एसीबी जांच के आदेश

रांची, 4 फरवरी (आईएएनएस)। वर्ष 2016 में झारखंड राज्य स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित बॉलीवुड सिंगर सुनिधि चौहान के कार्यक्रम और स्कूली बच्चों के बीच टी-शर्ट, मिठाई व टॉफी वितरण के नाम पर हुए घोटाले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) करेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस बाबत प्राप्त शिकायतों की एसीबी जांच के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। यह मामला रघुवर दास के मुख्यमंत्रित्व काल का है। इस मामले को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका सुनवाई के लिए विचाराधीन है। साल 2016 में झारखंड स्थापना दिवस समारोह में हुए खर्च में गड़बड़ियों का यह मामला विधायक सरयू राय ने विधानसभा में भी उठाया था, जिसपर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि सरकार इस मामले की एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच कराने को तैयार है। माना जा रहा है कि एसीबी जांच से पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की परेशानियां बढ़ सकती हैं। झारखंड स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए पाश्र्व गायिका सुनिधि चौहान का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आर्चर्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने कार्यक्रम के लिए 44 लाख 27 हजार 500 का कोटेशन दिया था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में 9 नवंबर 2016 को हुई बैठक में दिए गए निर्देश पर राशि आवंटित की गई थी। इसके बावजूद इस कार्यक्रम पर 10 लाख 94 हजार 781 रुपए अलग से खर्च किए गए। इस मामले में सरकार की तरफ से बताया गया कि कलाकारों के ठहरने, भोजन, वाहन और एयर टिकट मद में लगभग 11 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च हुए थे, जिसका भुगतान रांची के तत्कालीन उपायुक्त द्वारा किया गया था। राज्य स्थापना दिवस पर 13 से 15 नवंबर तक कई कार्यक्रम हुए थे। इस दौरान स्कूली बच्चों के बीच टॉफी, टी-शर्ट बांटने के लिए बगैर टेंडर निकाले करोड़ों की खरीदारी हुई थी। आरोप है कि प्रदेश के 9000 स्कूलों में टॉफी व टी-शर्ट बंटे ही नहीं और कागज पर आपूर्ति दिखा दी गयी। विधायक सरयू राय के इन आरोपों को सरकार ने विधानसभा में सही माना था। सरयू राय का आरोप है कि राज्य स्थापना दिवस 2016 के दिन स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच वितरण के लिए टॉफी की आपूर्ति लाला इंटरप्राइजेज जमशेदपुर ने की थी, वहीं पांच करोड़ रुपये के टी-शर्ट की आपूर्ति का काम कुड़ू फैब्रिक्स लुधियाना को दिया गया था। हकीकत यह है कि राज्य के 9000 स्कूलों तक ना टॉफी पहुंची और ना ही टी-शर्ट, जबकि इसके एवज में पूरा भुगतान हो चुका था। –आईएएनएस एसएनसी/एसजीके

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