नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, मालगाड़ियों के लोको पायलटों से लगातार 13 से 14 घंटे तक काम करवाया जा रहा था, जबकि रेलवे के नियमों के मुताबिक कोई भी लोको पायलट 11 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कर सकता।
CMS रिपोर्ट में हुआ गड़बड़ी का खुलासा
यह मामला तब सामने आया जब सिकंदराबाद डिवीजन में एक लोको पायलट ने ड्यूटी पर आने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि उसे पर्याप्त आराम नहीं मिला। जांच में पता चला कि उसका ड्यूटी समय 13 घंटे 55 मिनट था, जिसे क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) में कम दिखाया गया। पायलट ने दावा किया कि उसने 14 घंटे 26 मिनट तक काम किया था, लेकिन रिकॉर्ड में 31 मिनट कम दर्ज किए गए।
620 मामलों में नियमों का उल्लंघन
जांच में यह भी पाया गया कि 1 अप्रैल से 14 अप्रैल 2025 के बीच SCR में ऐसे 620 मामले थे, जिनमें लोको पायलटों ने 13:55 से 14:00 घंटे तक ड्यूटी की। इनमें से 545 मामले अकेले सिकंदराबाद डिवीजन में पाए गए।
विभिन्न मंडलों में भी गड़बड़ी
विजयवाड़ा मंडल – 42 मामले
गुंटकल मंडल – 26 मामले
गुंटूर और नांदेड़ – 3-3 मामले
हैदराबाद मंडल – 1 मामला
यह सब मामले यह दिखाते हैं कि लोको पायलटों को जबरन ज्यादा देर तक ड्यूटी पर रखा जा रहा था और साइन-ऑफ (ड्यूटी खत्म होने की एंट्री) के समय गलत जानकारी भरवाई जा रही थी।
रेलवे का सख्त रुख, दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश
SCR ने इस पर एक परिपत्र जारी किया है, जिसमें इस गड़बड़ी को ‘गंभीर अनियमितता’ बताया गया है। रेलवे ने साफ कहा है कि ट्रेन परिचालन से जुड़े आंकड़ों में किसी भी तरह की हेराफेरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न सिर्फ नियमों के उल्लंघन को उजागर करता है, बल्कि लोको पायलटों की सेहत और ट्रेनों की सुरक्षा को भी खतरे में डालता है। रेलवे ने अब सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों को तुरंत रोका जाए और सुनिश्चित किया जाए कि पायलटों को पर्याप्त आराम मिले।




