नई दिल्ली, 28 मई (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में कोरोना से बड़ी संख्या में लोगों की मौत के मद्देनजर अलग-अलग हिस्सों में इलेक्ट्रिक या सीएनजी से संचालित खराब शवदाह गृहों को ठीक करवाने और नए शवदाह गृह बनाए जाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और नगर निगमों को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच 27 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील कमलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि दिल्ली के कई इलेक्ट्रिक शवदाह गृह खराब हो गए हैं। उन्हें न सिर्फ मरम्मत करने की जरूरत है बल्कि और इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का निर्माण करने की जरूरत है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार और दिल्ली के सभी नगर निगम अपनी वेबसाईट पर अपने-अपने इलाकों के श्मशान घाट और कब्रगाह का ब्यौरा दें ताकि आम लोगों को इसकी जानकारी मिल सके। याचिका में कहा गया है कि सराय काले खां स्थित दो इलेक्ट्रिक शवदाह गृहों में से एक ही शवदाह गृह काम कर रहा है। लकड़ी वाले शवदाह गृह में शवों को पूरी तरह जलाने में करीब 12 घंटे लग जाते हैं जबकि इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में शव तीन घंटे में जल जाते हैं। ऐसे में शवों की संख्या काफी ज्यादा होने पर लोग स्वाभाविक तौर पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का विकल्प चुनते हैं। याचिका में कहा गया है कि लकड़ी वाले शवदाह गृह में शवों को पूरी तरह जलने में काफी समय लगने की वजह से मृतकों के रिश्तेदार उनकी अस्थियों को लेने के लिए अगले दिन आते हैं। जबकि इलेक्ट्रिक शवदाह गृहों में तीन घंटे के बाद ही अस्थियां मिल जाती हैं। इससे इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का विकल्प चुनने वाले को अस्थियों को लेने के लिए श्मशान घाट पर दोबारा नहीं आना पड़ता है। याचिका में कहा गया है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करनेवाले रजिस्ट्रार जनरल के निर्देश दिया जाए कि वो इन प्रमाण पत्रों को आनलाइन जारी करने का दिशानिर्देश जारी करें। हिन्दुस्थान समाचार/ संजय/पवन




