नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में नागपुर में आयोजित एक अल्पसंख्यक संस्थान के दीक्षांत समारोह में धर्म और जाति से परे राजनीति करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्य जाति, धर्म, भाषा या लिंग के बजाय उसके गुणों से निर्धारित होना चाहिए। उनका मानना है कि लोग समाज सेवा को सबसे ऊपर रखते हैं। गडकरी ने पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान कही अपनी बात याद करते हुए कहा कि जो करेगा जात की बात, उसको मारूंगा लात। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे चुनाव हार जाऊं या मंत्री पद चला जाए, वो अपने इस सिद्धांत पर अटल रहेंगे।
‘मंत्री पद नहीं मिलने से मर थोड़े ही जाऊंगा’
गडकरी ने समानता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं बल्कि उसके गुणों से जाना जाता है। मैं राजनीति में हूं और यहां कई तरह की बातें होती हैं। लेकिन मैंने अपने तरीके से काम करने का फैसला किया है। मुझे इस बात की चिंता नहीं है कि कौन मुझे वोट देगा। उन्होंने आगे कहा कि मेरे दोस्तों ने कहा कि तुम्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था। लेकिन मैंने जीवन में इसी सिद्धांत पर चलने का निश्चय किया है। चुनाव हारने या मंत्री पद न मिलने से मैं मर थोड़े ही जाऊंगा।
मुस्लिम समुदाय से इंजीनियर, IPS और IAS अफसर निकले
गडकरी ने आगे कहा कि उन्होंने एमएलसी रहते हुए एक इंजीनियरिंग कॉलेज की अनुमति अंजुमन-ए-इस्लाम संस्थान (नागपुर) को ट्रांसफर कर दी थी। उन्हें लगा कि उन्हें इसकी ज़्यादा ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय से ज़्यादा इंजीनियर, आईपीएस और IAS अफ़सर बनेंगे तो सबका विकास होगा। हमारे पास पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण है। आज अंजुमन-ए-इस्लाम के बैनर तले हज़ारों छात्र इंजीनियर बन चुके हैं।





