नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । प्रदर्शन में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। लोगों ने एनबीसीसी और सीआर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सोसाइटी से गौर प्रोजेक्ट के मुख्य गेट तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर बिजली कटौती और पार्किंग न मिलने जैसी समस्याओं को सामने रखा। निवासी मृत्युंजय शर्मा ने बताया कि बिल्डर ने फ्लैट खरीदते समय पार्किंग सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन आज भी सैकड़ों परिवार इससे वंचित हैं।
पार्क और लिफ्ट को लेकर निवासियों में नाराजगी, उठी ये मांग
रिवर व्यू सोसाइटी के निवासियों का आक्रोश सिर्फ बिजली और पार्किंग तक सीमित नहीं रहा। लोगों ने लिफ्ट और बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित स्थान की कमी पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि बारिश के दौरान ओपन लॉबी से लिफ्ट शाफ्ट में पानी भर जाता है, जिससे लिफ्ट के इलेक्ट्रॉनिक पैनल खराब हो जाते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, सोसाइटी में न तो बच्चों के लिए कोई पार्क है और न ही हरियाली वाला कोई खुला स्थान, जहां परिवार समय बिता सकें। निवासियों ने मांग की कि पोडियम क्षेत्र में ग्रीन ज़ोन विकसित किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल वातावरण मिल सके। इसके अलावा, क्लब हाउस में अब तक कोई भी बुनियादी सुविधा न मिलने पर भी लोगों ने नाराजगी जताई और इसे सोसाइटी में सुविधाओं की कमी का एक और उदाहरण बताया।
DLP एक साल बढ़ाने की मांग, कहा- जल्द समाधान नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
रिवर व्यू सोसाइटी के निवासियों ने मरम्मत और रखरखाव को लेकर एनबीसीसी की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए डिफेक्ट्स लायबिलिटी पीरियड (DLP) को एक साल बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बिल्डर द्वारा समय पर मरम्मत कार्य नहीं किया जा रहा, जिससे सोसाइटी में लगातार समस्याएं बनी हुई हैं। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो विरोध और भी अधिक उग्र रूप लेगा।
बता दें कि ग्रेटर नोएडा में यह कोई अकेला मामला नहीं है। शहर की अन्य सोसायटीज के निवासी भी बिल्डरों की मनमानी से परेशान हैं। लिफ्ट में आए दिन हो रहे हादसे अब आम बात बन चुकी है। वहीं, प्राधिकरण की निष्क्रियता ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। अफसरों की चुप्पी और उदासीनता के चलते बिल्डरों को मनमानी करने की खुली छूट मिल गई है, जिससे आमजन का आक्रोश अब धीरे-धीरे फूटने लगा है।





