नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आज भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। देश की सुरक्षा रणनीति के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाने वाले अजीत डोभाल को अक्सर भारत का जेम्स बॉन्ड कहा जाता है। इसकी वजह है उनकी वो खुफिया ज़िंदगी, जिसमें उन्होंने दुश्मन की जमीन पर रहकर भारत के लिए बड़े-बड़े मिशन अंजाम दिए। सात साल तक पाकिस्तान में एक गुप्त एजेंट के तौर पर रहना आसान नहीं था, लेकिन अजीत डोभाल ने यह कर दिखाया। इससे पहले वे इंटेलिजेंस ब्यूरो, सिक्किम मिशन और उग्रवाद विरोधी अभियानों में अपनी काबिलियत साबित कर चुके थे। पाकिस्तान में रहते हुए उन्होंने वहां के परमाणु कार्यक्रम समेत कई संवेदनशील जानकारियां भारत तक पहुंचाईं। लेकिन इसी दौरान एक ऐसा पल आया, जब उनकी जान पर बन आई।
लाहौर का किस्सा: “तुम हिंदू हो ना?”
इस घटना का जिक्र डी. देवदत्त की किताब ‘अजीत डोभाल – ऑन ए मिशन’ में मिलता है। किताब के मुताबिक, एक बार अजीत डोभाल लाहौर में एक मकबरे के आसपास घूम रहे थे। तभी एक कोने में बैठे सफेद दाढ़ी वाले बुजुर्ग ने उन्हें गौर से देखा और अचानक पूछ लिया “क्यों, तुम हिंदू हो ना? यह सवाल सुनते ही डोभाल चौंक गए। उस वक्त वे मुस्लिम वेश में पाकिस्तान में खुफिया एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने तुरंत इंकार किया, लेकिन उनके मन में डर बैठ गया कि कहीं उनकी असली पहचान उजागर तो नहीं हो गई। बुजुर्ग ने बिना कुछ कहे डोभाल का हाथ पकड़ा और उन्हें तंग गलियों से होते हुए एक छोटे से कमरे में ले गया। कमरे में पहुंचते ही उसने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। इस अचानक हरकत से डोभाल को लगा कि अब शायद बचना मुश्किल है।
कानों के छेद से हुई पहचान
कुछ देर बाद डोभाल ने हिम्मत करके पूछा कि उसने उन्हें हिंदू कैसे पहचान लिया। इस पर बुजुर्ग ने कहा, “तुम्हारे कानों में छेद हैं। दरअसल, हिंदू परिवारों में बच्चों के कान छिदवाने की परंपरा होती है। यही छोटा-सा संकेत उस बुजुर्ग के लिए पहचान की वजह बन गया। डोभाल ने तुरंत सफाई दी कि उनका जन्म हिंदू परिवार में हुआ था, इसलिए बचपन में कान छिदवाए गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस्लाम अपना लिया। यह सुनकर बुजुर्ग ने उन्हें सलाह दी कि आगे से शक से बचने के लिए कानों के छेद की सर्जरी करा लें।





