नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनाव भले दूर हों, लेकिन राजनीतिक हलचल अभी से तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस से नाता तोड़ने वाले वरिष्ठ मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब नई राजनीतिक पारी की तैयारी में हैं। चर्चा है कि वह 15 फरवरी को समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे। उनके साथ कुछ पूर्व विधायक भी सपा का रुख कर सकते हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में नई सरगर्मी देखने को मिल रही है। कांग्रेस से इस्तीफे के बाद सिद्दीकी के अगले कदम को लेकर कई तरह की अटकलें लग रही थीं। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मनाने की कोशिश भी की, लेकिन अब सपा में संभावित शामिल होने की खबर ने सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
मायावती के करीबी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर कई अहम पड़ावों से गुजरा है। कांग्रेस में आने से पहले वह बहुजन समाज पार्टी का प्रमुख चेहरा रह चुके हैं। एक समय उनकी पहचान पार्टी प्रमुख मायावती के भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर होती थी। हालांकि, साल 2017 में बसपा से उनका निष्कासन हो गया, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस का रुख किया। लेकिन कांग्रेस में भी उनका साथ लंबा नहीं चला। 24 जनवरी को उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले के साथ ही कुछ अन्य नेताओं ने भी संगठन से दूरी बनाने का संकेत दिया, जिससे प्रदेश की सियासत में नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया।
इस्तीफे के पीछे क्या थी वजह ?
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ते समय साफ संकेत दिए थे कि वह पार्टी के अंदरूनी हालात और काम करने के तरीके से संतुष्ट नहीं थे। उनके मुताबिक, संगठन की कार्यप्रणाली उन्हें असहज महसूस कर रहे थे। साथ ही यह चर्चा भी रही कि उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पा रहा था, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ी।
उनका इस्तीफा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दल चुनावी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं, यह घटनाक्रम सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी दलों की सक्रिय तैयारियों से भी जोड़कर देख रहे हैं, जहां संभावित नई राजनीतिक साझेदारियां आने वाले चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती हैं।





