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Sunday, March 15, 2026
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मेरे पिता का नाम नहीं मिटाया जा सकता… रवींद्र चव्हाण के बयान पर रितेश देशमुख का भावुक पलटवार

रवींद्र चव्हाण की विवादित टिप्पणी पर रितेश देशमुख ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता विलासराव देशमुख का नाम लोगों के दिलों से कभी मिटाया नहीं जा सकता।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भावनाएं और सियासी बयानबाज़ी आमने-सामने आ गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की एक टिप्पणी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर अब दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे और बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने भावुक लेकिन स्पष्ट पलटवार किया है। रितेश ने साफ शब्दों में कहा है कि उनके पिता का नाम न तो मिटाया जा सकता है और न ही लोगों के दिलों से निकाला जा सकता है।

रितेश देशमुख ने एक वीडियो संदेश जारी किया

दरअसल, सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रवींद्र चव्हाण ने कहा था कि वह पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि विलासराव देशमुख की यादें उनके गृह नगर लातूर से मिटा दी जाएंगी। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। कांग्रेस समेत कई दलों ने इसे दिवंगत नेता की विरासत और सम्मान पर सीधा हमला बताया।

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए रितेश देशमुख ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी किया। वीडियो में रितेश भावुक नजर आए और उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा, मैं विनम्रता से कहना चाहता हूं कि जो लोग पूरी ज़िंदगी जनता के लिए जीते हैं, उनके नाम लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। लिखी हुई चीज़ों को मिटाया जा सकता है, लेकिन दिलों पर पड़ी गहरी छाप को नहीं मिटाया जा सकता। रितेश का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और बड़ी संख्या में लोगों ने उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दी।

क्या था रवींद्र चव्हाण का बयान?

दरअसल, सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रवींद्र चव्हाण ने कहा था कि उन्हें पूरा भरोसा है कि लातूर से विलासराव देशमुख की यादें मिटा दी जाएंगी। उनके इस बयान ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में बल्कि आम जनता के बीच भी तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया।

विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। वे लातूर से कई बार विधायक चुने गए, दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र सरकार में भी मंत्री पद संभाल चुके थे।

विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के उन नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्होंने दशकों तक राज्य की राजनीति को दिशा दी। वह लातूर से कई बार विधायक चुने गए, दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने और केंद्र सरकार में भी मंत्री पद संभाला। उनके कार्यकाल को आज भी विकास, प्रशासनिक स्थिरता और जनसंपर्क के लिए याद किया जाता है। ऐसे में उनके नाम और योगदान को लेकर की गई टिप्पणी ने स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाओं को आहत किया है।

कांग्रेस का तीखा हमला

चव्हाण के बयान पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई और बीजेपी पर दिवंगत नेता की विरासत का अपमान करने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाता है और उस नेता के योगदान को कमतर आंकने की कोशिश है, जिसने अपना पूरा जीवन महाराष्ट्र के विकास के लिए समर्पित कर दिया।

NCP (अजित पवार गुट) ने भी जताया विरोध

इस विवाद में एनसीपी (अजित पवार गुट) भी कूद पड़ी। पार्टी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने रवींद्र चव्हाण के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि दिवंगत नेताओं को लेकर एक नैतिक मर्यादा होती है, जिसका पालन सभी को करना चाहिए।

नवाब मलिक ने कहा,विलासराव देशमुख लातूर से कई बार चुनाव जीत चुके हैं, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे हैं। दिवंगत आत्माओं के बारे में बोलते समय एक मर्यादा होनी चाहिए। किसी के नाम को मिटाने की बात करना न तो उचित है और न ही स्वीकार्य।

बढ़ता राजनीतिक तनाव

रितेश देशमुख की भावुक प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग विलासराव देशमुख के समर्थन में सामने आ रहे हैं और उनके योगदान को याद कर रहे हैं।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति में दिवंगत नेताओं की विरासत को लेकर भाषा और मर्यादा की सीमाएं लांघी जा रही हैं?फिलहाल, रितेश देशमुख का यह बयान उनके पिता की विरासत की रक्षा के साथ-साथ राजनीतिक शालीनता की याद दिलाने वाला माना जा रहा है।

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