नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखे जाने के दावे ने देश भर में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विधायक के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
‘मस्जिद के नाम पर राजनीति न हो’
बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने टीएमसी विधायक के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा अयोध्या से जुड़ा था और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान देश भर के मुसलमानों ने किया है।उन्होंने कहा, कोर्ट ने 5 एकड़ जमीन दी, इसलिए अब लोगों को मस्जिद के नाम पर राजनीति करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि समय के साथ बहुत सी बातें भुला दी जाती हैं, लेकिन आज के राजनीतिक माहौल में लोग ऐसे मुद्दों को फिर से राजनीति में लाते रहते हैं।
जगतगुरु और बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया
टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के बयान को लेकर संत समाज और बीजेपी नेताओं ने इसे देश विरोधी गतिविधि बताया है। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने विधायक के बयान को “देश विरोधी गतिविधि” करार दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद सुलझा दिया है, राम मंदिर बन गया है और राम लल्ला की प्राण प्रतिष्ठा पूरी हो गई है। आचार्य ने विवादास्पद रूप से MLA का सिर लाने वाले को 1 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की।
बीजेपी नेता राम विलास वेदांती का बयान
राम मंदिर आंदोलन के सदस्य और बीजेपी नेता वेदांती ने स्पष्ट कहा कि 6 दिसंबर को दुनिया की कोई भी ताकत अब भारत में कहीं भी दूसरी बाबरी मस्जिद नहीं बना सकती। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नारे सबका साथ, सबका विकास का हवाला देते हुए सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने पर जोर दिया।इस घटना ने 6 दिसंबर की संवेदनशील तारीख के पास राजनीतिक और सांप्रदायिक बयानबाजी को फिर से गरमा दिया है।
संत समाज और बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया
टीएमसी विधायक के बयान पर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने इसे देश विरोधी गतिविधि करार दिया। आचार्य ने कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद का निष्पक्ष समाधान किया है, राम मंदिर बन गया है और राम लल्ला की प्राण प्रतिष्ठा पूर्ण हो गई है। उन्होंने विवादास्पद रूप से कहा कि इस तरह का बयान देने वाले विधायक के खिलाफ एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, हुमायूं कबीर के बयान ने 6 दिसंबर की संवेदनशील तारीख के पास राजनीतिक और सांप्रदायिक बयानबाजी को फिर से उभारा है। उनका कहना है कि इस तरह के विवादों से न केवल समाज में मतभेद बढ़ते हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता पर भी असर पड़ सकता है। देश भर के मुस्लिम समाज और धर्मगुरु इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करने और मस्जिद के नाम पर राजनीति से बचने का संदेश दे रहे हैं।





