नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। किसानों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत विफल होने के बाद बुधवार 19 मार्च को पंजाब पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों के टेंट हटा दिए। इसके अलावा, किसान नेताओं जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंढेर को मोहाली में हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के बाद किसान संगठनों ने विरोध तेज करने की चेतावनी दी है।
बैठक फेल, टेंट हटाने की कार्रवाई शुरू
बुधवार को चंडीगढ़ में सुबह 11 बजे किसानों और केंद्र सरकार के बीच बैठक हुई। चार घंटे तक चली इस बैठक के बाद दोपहर 3 बजे किसान नेताओं ने प्रेस वार्ता कर कहा कि उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं। इसके बाद किसान नेता शंभू बॉर्डर की ओर रवाना हुए, लेकिन शाम 5 बजे पंजाब पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया। फिर शाम 7 बजे पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर बुलडोजर चलाकर किसानों के अस्थायी टेंट हटा दिए।
भगवंत मान सरकार पर विपक्ष का हमला
पंजाब पुलिस की इस कार्रवाई पर कांग्रेस और बीजेपी ने भगवंत मान सरकार को घेरा। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और बजरंग पुनिया ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने किसानों को बातचीत के नाम पर फंसाया और उन्हें हिरासत में लिया। वहीं, बीजेपी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी केंद्र और किसानों के बीच समझौता नहीं होने देना चाहती। पंजाब सरकार ने अपने बचाव में कहा कि शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पिछले एक साल से प्रदर्शन चल रहा था, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही थी। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि किसानों की मांगें केंद्र से जुड़ी हैं, इसलिए उन्हें दिल्ली में प्रदर्शन करना चाहिए, न कि पंजाब की सड़कों को बंद रखना चाहिए।
किसानों की कड़ी प्रतिक्रिया
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार मिलकर किसानों पर अत्याचार कर रही हैं और उन्हें इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने ऐलान किया कि गुरुवार से हरियाणा और पंजाब में डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। किसान संगठनों ने कहा कि वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। पंजाब और हरियाणा में विभिन्न स्थानों पर धरने की योजना बनाई जा रही है। केंद्र सरकार ने कहा कि किसानों के मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और किसान संगठनों के बीच कोई नया समझौता हो पाता है या आंदोलन और उग्र होगा।





