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Wednesday, March 4, 2026
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मायावती ने UGC नियमों पर SC के फैसले का स्वागत किया, सवर्णों के न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगाकर सभी वर्गों के अधिकार और न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 13 जनवरी 2026 को लागू हुए यूजीसी के नियमों पर रोक लगा दी है और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि इन नियमों को दोबारा ड्राफ्ट किया जाए। नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए थे, लेकिन इनमें केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए सुरक्षा प्रावधान हैं, जबकि सामान्य वर्ग को कोई स्पष्ट संरक्षण नहीं दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि नियमों में सवर्ण समाज की उपेक्षा हुई है, इसलिए इसे लागू करना असंवैधानिक होगा।

”न्याय और सामाजिक शांति से जुड़ा मामला है”

इस फैसले पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय उचित है और अगर नियम लागू करते समय सभी वर्गों की राय ली जाती और सवर्ण/अपरकास्ट समाज को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिया जाता, तो विवाद और सामाजिक तनाव से बचा जा सकता था। मायावती ने यह भी कहा कि नए नियमों के कारण सामाजिक माहौल में तनाव पैदा हुआ है और इसे केवल जाति या धर्म के मुद्दे तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह समानता, न्याय और सामाजिक शांति से जुड़ा मामला है।

”इसे लागू करते समय किसी वर्ग की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए”

मायावती ने अपने बयान में लिखा कि यूजीसी ने नियम बनाते समय सभी पक्षों की सहमति नहीं ली, जिससे समाज में असंतोष और विवाद पैदा हुए। उन्होंने प्रशासन और विश्वविद्यालयों से अपील की कि नए नियम पारदर्शी और निष्पक्ष हों और सभी वर्गों के अधिकारों का ध्यान रखा जाए। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा में समानता जरूरी है, लेकिन इसे लागू करते समय किसी वर्ग की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए।

संतुलन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने भी कहा कि आजादी के 75 सालों में भारत ने जातिविहीन समाज की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है, क्या अब हम पीछे जा रहे हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया और नए नियमों पर रोक लगाई, ताकि सभी पक्षों की भागीदारी और न्याय सुनिश्चित किया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम उच्च शिक्षा संस्थानों में संतुलन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

सरकार और UGC को नए नियमों को फिर से तैयार करना होगा

अब सरकार और यूजीसी को नए नियमों को फिर से तैयार करना होगा, जिसमें सभी वर्गों की भागीदारी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल जाति या धर्म का नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और सामाजिक शांति से जुड़ा है। उनके अनुसार नए नियमों को ऐसे बनाना होगा कि समाज के सभी वर्गों के अधिकार सुरक्षित रहें और उच्च शिक्षा संस्थानों में संतुलन और भरोसा कायम रहे।

”देश में सामाजिक तनाव और असंतोष न बढ़े”

यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की यह रोक न केवल शिक्षा संस्थानों में न्याय सुनिश्चित करेगी, बल्कि यह सामाजिक रूप से संवेदनशील वर्गों के अधिकारों और प्रतिनिधित्व की बहस को भी स्थिर करेगी। मायावती ने जोर देकर कहा कि नए नियमों के निर्माण में सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है, ताकि देश में सामाजिक तनाव और असंतोष न बढ़े।

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