नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क/ बसपा सुप्रीमो मायावती, जो दलितों के अधिकारों और राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जानी जाती हैं, का जन्म 15 जनवरी 1956 को गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर गांव में हुआ। उनका पूरा नाम चंद्रावती था और वे दलित परिवार में जन्मी थीं। उनके पिता प्रभुदास सरकारी कर्मचारी थे। बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाली मायावती ने 1975 में दिल्ली के कालिंदी कॉलेज से LLB और गाजियाबाद से बी.एड. की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ समय तक शिक्षिका के रूप में भी काम किया।
कांशीराम से मुलाकात और राजनीति में प्रवेश
साल 1977 में मायावती की जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया, जब उनकी मुलाकात बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम से हुई। कांशीराम ने उन्हें राजनीति में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और कहा कि वे उन्हें इतनी बड़ी नेता बना सकते हैं कि IAS अधिकारी उनके आदेशों का पालन करेंगे। यह वाक्य मायावती के जीवन में बदलाव की शुरुआत बन गया।
BSP के गठन और मायावती की भूमिका
1984 में कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) की स्थापना की, और मायावती को पार्टी के कोर टीम में शामिल किया। 1989 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा। दलित समाज और कमजोर वर्ग के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने खुद को एक सशक्त नेता के रूप में स्थापित किया।
चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं
मायावती ने राजनीति में इतिहास रचते हुए उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री के रूप में चार बार कार्यभार संभाला।
1995: पहली बार मुख्यमंत्री बनीं और उत्तर प्रदेश की सबसे युवा और पहली दलित मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया।
1997: तीन महीने के लिए मुख्यमंत्री रहीं।
2002: तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं।
2007: चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं और पूरे कार्यकाल तक रहीं।
मायावती आज भी राजनीति में सक्रिय
मायावती आज भी बसपा की सुप्रीमो हैं और दलित समाज की प्रमुख नेता मानी जाती हैं। उन्होंने इस बार अकेले ही लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उनके संघर्ष और राजनीतिक सफर ने उन्हें भारत की राजनीति में एक खास मुकाम पर पहुंचाया।





