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Monday, March 2, 2026
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मेरठ में मौलवी का बेटा बना ‘कृष्ण’, मंदिर में एक साल तक करता रहा पूजा-पाठ, ऐसे हुई पहचान उजागर

यूपी के मेरठ में एक मुस्लिम युवक खुद को "कृष्ण" बताकर एक साल से मंदिर में रह रहा था। वह स्थानीय लोगों से अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बिहार के एक मौलवी का बेटा मोहम्मद कासिम खुद को “कृष्ण” बताकर मंदिर में रह रहा था और पूजा-पाठ कर रहा था। बताया जा रहा है कि कासिम पिछले करीब एक साल से मंदिर परिसर में रह रहा था और स्थानीय लोगों को अपनी असली पहचान से अनजान रखे हुए था। फिलहाल, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। 

दरअसल, यह मामला तब सामने आया जब मंदिर में आने वाले कुछ लोगों को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ। संदेह गहराने पर उससे आधार कार्ड दिखाने को कहा गया, लेकिन वह टालमटोल करने लगा और कुछ दिनों के लिए गांव से लापता हो गया। कुछ समय बाद वह दोबारा मंदिर में लौट आया, लेकिन इस बार ग्रामीणों ने उसे पकड़कर पूछताछ की, जिसमें उसने अपनी असल पहचान स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने मंदिर में रहकर किन गतिविधियों को अंजाम दिया और उसके पीछे मकसद क्या था।

मंदिर में “कृष्ण” नाम से रह रहा था युवक

मेरठ जिले के दौराला थाना क्षेत्र के दादरी गांव में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर में पिछले एक साल से रह रहे युवक की असली पहचान सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि मंदिर में लंबे समय से कोई पुजारी नहीं था। ऐसे में एक साल पहले एक युवक गांव पहुंचा और खुद को “कृष्ण पुत्र संतोष, निवासी दिल्ली” बताकर मंदिर में रहने की अनुमति मांगी। ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं हुई, क्योंकि मंदिर देखरेख विहीन था। उन्होंने युवक को मंदिर में रहने की इजाजत दे दी। 

कृष्ण के नाम से पहचान बना चुके इस युवक ने मंदिर में नियमित पूजा-पाठ, प्रसाद वितरण, हवन और धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर दिए। वह ग्रामीणों से हस्तरेखा और ज्योतिष से जुड़ी बातें भी करता था, जिससे धीरे-धीरे उसे एक धर्मगुरु जैसा सम्मान मिलने लगा। ग्रामीण उसका सम्मान करने लगे थे और धीरे-धीरे उसने ग्रामीणों का विश्‍वास जीत लिया। लेकिन हाल ही में कुछ लोगों को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ और जब पूछताछ शुरू हुई तो उसकी असल पहचान सामने आ गई।

पहचान पर संदेह गहराया, पूछताछ में सामने आई सच्चाई

शुरुआत में मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों से ग्रामीणों का विश्वास जीत चुके युवक पर धीरे-धीरे संदेह गहराने लगा। गांव के कुछ लोगों को उसकी भाषा, उच्चारण और व्यवहार में कुछ असामान्यता नजर आई, जो उसकी बताई गई पहचान से मेल नहीं खा रही थी। जब उससे पहचान पत्र दिखाने की मांग की गई, तो वह टालमटोल करने लगा और आधार कार्ड लाने का बहाना बनाकर करीब 15 दिनों के लिए गांव से गायब हो गया। अचानक युवक की गैरमौजूदगी ने ग्रामीणों के शक को और पुख्ता कर दिया। 

वहीं, कुछ दिनों बाद वह वापस आ गया और मंदिर में फिर से रहने लगा। इस दौरान मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें वह भी मौजूद था। उसी दौरान वह मंदिर के एक कमरे से कुछ सामान निकाल रहा था कि कुछ ग्रामीणों ने उसे रोककर पूछताछ शुरू कर दी। बात इतनी आगे बढ़ गई कि मौके पर मौजूद लोगों ने उसे वहीं रोके रखा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में ले लिया। 

पुलिस जांच में हुआ सच का खुलासा

हिंदू पुजारी बताने वाले युवक की पहचान आखिरकार पुलिस जांच में उजागर हो गई। मेरठ पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान युवक ने अपना असली नाम मोहम्मद कासिम बताया और स्वीकार किया कि वह बिहार निवासी है। उसने यह भी खुलासा किया कि उसके पिता अब्बास, बिहार में मौलवी हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि कासिम कई महीनों से मंदिर में पुजारी के रूप में रह रहा था और इस दौरान मंदिर में मिलने वाली दान-दक्षिणा का निजी इस्तेमाल कर रहा था। वह ‘कृष्ण’ नाम से गांववालों के बीच रह रहा था और पूजा-पाठ कर धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

एसपी सिटी मेरठ आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि दौराला थाना क्षेत्र के एक मंदिर से सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। युवक की पहचान, पूछताछ और जांच में पूरी स्थिति स्पष्ट हो गई। उन्होंने बताया कि आरोपी ने धार्मिक पहचान छिपाकर विश्वास में धोखा देने, दान राशि के दुरुपयोग और धार्मिक आस्था के साथ छल करने के आरोपों को कबूल किया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

मामले को लेकर जांच में जुटी पुलिस

मेरठ पुलिस ने आरोपी की पहचान और दावों की पुष्टि के लिए बिहार पुलिस से संपर्क किया है। कासिम के मूल निवास की जांच के साथ यह भी पड़ताल की जा रही है कि उसके मंदिर में रहने और स्वयं को पुजारी बताने के पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी या फिर यह केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए की गई धोखाधड़ी थी। एसपी ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान किसी और व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, या यह प्रतीत होता है कि यह संगठित प्रयास था, तो संबंधित सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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