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Friday, April 10, 2026
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खरगे ने PM मोदी को लिखा पत्र, जाति जनगणना को लेकर दिए तीन सुझाव, कहा- 2023 का जवाब नहीं मिला

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा है। इस लेटर में उन्होंने जाति जनगणना के संबंध में तीन पॉइंट साझा किए हैं।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर जाति आधारित जनगणना को लेकर सुझाव दिए हैं। उन्होंने इस पत्र को अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर भी सार्वजनिक किया। खरगे ने यह भी याद दिलाया कि उन्‍होंने वर्ष 2023 में पत्र लिखकर जातिगत जनगणना कराने की मांग रखी थी, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया गया। 

खरगे ने पत्र सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि मैंने इससे पहले 16 अप्रैल 2023 को भी प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर पत्र भेजा था, लेकिन उसे लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा जातिगत जनगणना की मांग को भाजपा नेताओं ने आलोचना का विषय बनाया, जबकि अब खुद प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया है कि यह कदम सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2021 की स्थगित जनगणना में जाति को अलग श्रेणी के रूप में दर्ज करने की जो घोषणा हुई है, उसके क्रियान्वयन को लेकर अभी तक कोई ठोस विवरण सामने नहीं आया है। खरगे ने प्रधानमंत्री को तीन सुझाव भी दिए हैं, जो आगामी जनगणना में जातीय जानकारी को शामिल करने के तरीके से संबंधित हैं। 

जाति जनगणना की प्रक्रिया में तेलंगाना मॉडल अपनाने की सलाह


कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को भेजे अपने पत्र में सुझाव दिया कि जनगणना के दौरान प्रयोग की जाने वाली प्रश्नावली की बनावट बेहद अहम है। उन्होंने सुझाव दिया कि गृह मंत्रालय को प्रश्नावली तैयार करने के लिए तेलंगाना मॉडल से सीख लेनी चाहिए, न केवल सवालों के स्वरूप को लेकर, बल्कि उन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को भी ध्यान में रखते हुए। खरगे ने यह भी कहा कि जातिगत जनगणना के नतीजे चाहे जो भी हों, यह जरूरी है कि अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 50% आरक्षण की संवैधानिक सीमा को हटाया जाए। इसके लिए संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए।

उन्होंने याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 15(5), जो 20 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, जो निजी शैक्षणिक संस्थानों में SC, ST और OBC के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बावजूद 29 जनवरी 2014 को न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया था। खरगे ने इस प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग की।

‘जातिगत जनगणना से वंचित वर्गों को मिलेगा हक’


प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि जाति आधारित जनगणना जैसे प्रयास उन समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम हैं जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए पर रहे हैं या पिछड़े और उत्पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रक्रिया को न तो विभाजनकारी कहा जा सकता है और न ही इसे इस दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। खरगे ने यह भी कहा कि भारत एक महान राष्ट्र है, जहां लोग एक-दूसरे के लिए खड़े होते हैं और एकजुटता दिखाते हैं। हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के बाद भी यही भावना देखने को मिली। 

जाति जनगणना पर सभी दलों से विचार-विमर्श की मांग


अपने पत्र के अंत में मल्लिकार्जुन खरगे ने जोर देकर कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस यह मानती है कि हमारे संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित सामाजिक और आर्थिक न्याय तथा अवसर की समानता सुनिश्चित करने के लिए जातिगत जनगणना को व्यापक और सटीक तरीके से लागू किया जाना जरूरी है। खरगे ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे उनके सुझाए गए बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करें और जल्द से जल्द सभी राजनीतिक दलों के साथ मिलकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर विमर्श करें।

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