नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कोलकाता रेप और मर्डर केस के बाद महिला सुरक्षा को लेकर देश में लगातार बहस चल रही है। इस संबंध में अब कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं को भयमुक्त वातावरण चाहिए। बेटियों को बराबर का हक मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि कई अपराध को ऐसे हैं जो दर्ज भी नहीं किए जाते हैं। उनके साथ हुआ कोई भी अपराध असहनीय है।
प्रधानमंत्री कई बार सुरक्षा को लेकर बात कर चुके हैं
इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर एक पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि, “प्रधानमंत्री मोदी जी लाल क़िले के भाषणों में कई बार महिला सुरक्षा पर बात कर चुके हैं, पर उनकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में ऐसा कुछ ठोस नहीं किया जिससे महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में कुछ रोकथाम हो। उल्टा, उनकी पार्टी ने कई बार पीड़िता का चरित्र हनन भी किया है, जो शर्मनाक है।”
पोस्ट में किए कई सवाल
खड़गे ने अपने पोस्ट में सवाल किया है कि क्या हर दीवार पर “बेटी बचाओ” पेंट करवा देने से सामाजिक बदलाव आएगा या सरकारें व क़ानून व्यवस्था सक्षम बनेगी? क्या हम Preventive क़दम उठा पा रहे हैं? क्या हमारा Criminal Justice System सुधरा है? क्या समाज के शोषित व वंचित अब एक सुरक्षित वातावरण में रह पा रहे हैं? क्या सरकार और प्रशासन ने वारदात को छिपाने का काम नहीं किया है? क्या पुलिस ने पीड़िताओं का अंतिम संस्कार जबरन करना बंद कर दिया है, ताकि सच्चाई बाहर न आ पाए? हमें ये सोचना है कि जब 2012 में दिल्ली में “निर्भया” के साथ वारदात हुई तो जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफ़ारिशें लागू हुई थीं, आज क्या उन सिफ़ारिशों को हम पूर्णतः लागू कर पा रहे हैं?
वर्कप्लेस पर Sexual Harassment of Women का सही तरीके से पालन हो रहा है
क्या 2013 में पारित Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act के प्रावधानों का ठीक ढंग से पालन हो रहा है, जिससे कार्यस्थल पर हमारी महिलाओं के लिए भयमुक्त वातावरण तैयार हो सके? संविधान ने महिलाओं को बराबरी का स्थान दिया है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध एक गंभीर मुद्दा
महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध एक गंभीर मुद्दा है। इन अपराधों को रोकना देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। हम सबको एकजुट होकर, समाज के हर तबके को साथ लेकर इसके उपाय तलाशने होंगे।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाए
Gender Sensitisation Curriculum हो या Gender Budgeting, Women Call Centres हो या हमारे शहरों में Street Lights और Women Washrooms जैसी मूलभूत सुविधा, या फिर हमारे Police Reforms हो या Judicial Reforms अब वक्त आ गया है कि हम हर वो कदम उठाए जिससे महिलाओं के लिए भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित हो सके।





