नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हिंदी भाषा ‘थोपे जाने’ के मुद्दे पर तमिलनाडु सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद जारी है। इस बीच 10 मार्च को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने DMK के लिए ‘असभ्य’ और अलोकतांत्रिक शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसे लेकर 11 मार्च को राज्यसभा में तीखी बहस हुई। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने धर्मेंद्र प्रधान के बयान की निंदा की और इसे तमिलनाडु की जनता के लिए अपमानजनक बताया। इस दौरान जब उपसभापति ने उन्हें बोलने से रोका तो खड़गे ने तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा- क्या-क्या ठोकना है, हम ठीक से ठोकेंगे, सरकार को ठोकेंगे।
खड़गे के इस बयान की राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने निंदा करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष की भाषा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सदन में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने के लिए खड़गे को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने खड़गे के शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की। इसके बाद खड़गे ने सफाई दी कि उन्होंने जो कुछ भी कहा वो आसन के लिए नहीं कहा था। उन्होंने उपसभापति हरिवंश से माफी मांगते हुए कहा कि उनके शब्द उनके लिए नहीं थे, उन्होंने सरकार की नीतियों के लिए ठोको शब्द का इस्तेमाल किया था और इसके लिए वो सरकार से माफी नहीं मांगेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के ‘बेईमान’ शब्द पर भी हुआ बवाल
मल्लिकार्जुन खड़गे के अपने शब्दों के लिए माफी मांगते हुए धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर भी निशाना साध दिया। उन्होंने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान तमिलनाडु के लोगों के लिए असभ्य भाषा का इस्तेमाल करेंगे तो ऐसे मंत्री का इस्तीफा ले लेना चाहिए। ये लोग देश की एकता के खिलाफ काम करते हैं। बता दें कि PM SHRI योजना के लिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के साथ MoU साइन करने से मना कर दिया था जिसके संदर्भ में धर्मेंद्र प्रधान से स्टालिन सरकार को बेईमान कहा था। इसके बाद जेपी नड्डा ने भी खड़गे की माफी को सराहा और कहा कि अगर आपने आसन के लिए नहीं बल्कि सरकार की नीतियों के लिए इस प्रकार के शब्द इस्तेमाल किए हैं तो भी उन शब्दों को सदन का कार्यवाई से बाहर निकालना चाहिए।





