नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह त्योहार सूर्य देव को समर्पित होता है और तब मनाया जाता है, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक भी माना जाता है। साल 2026 में सूर्य 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी कारण मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026, बुधवार को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह नया साल आने के बाद पड़ने वाला पहला बड़ा धार्मिक पर्व है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
देशभर में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है संक्रांति
मकर संक्रांति भारत के लगभग हर हिस्से में मनाई जाती है, लेकिन इसके नाम और परंपराएं अलग-अलग हैं। गुजरात में इसे उत्तरायण कहा जाता है, जहां लोग पूरे उत्साह के साथ पतंग उड़ाते हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में इस दिन खिचड़ी बनाई जाती है और दान-पुण्य किया जाता है। दक्षिण भारत में यही पर्व पोंगल के रूप में मनाया जाता है, जो फसल और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। कहीं इसे माघी, तो कहीं भोगी के नाम से भी जाना जाता है।
दो शुभ योग बनाएंगे मकर संक्रांति को खास
साल 2026 की मकर संक्रांति इसलिए भी खास है, क्योंकि इस दिन दो बेहद शुभ और दुर्लभ योग बन रहे हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग रहेगा। ये दोनों योग सुबह 7:15 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 3:03 बजे तक रहेंगे। मान्यता है कि इन योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है और जीवन की बाधाओं को दूर करता है।
पुण्य काल और ब्रह्म मुहूर्त का समय
मकर संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक रहेगा। इस दौरान सूर्य पूजा, दान और धार्मिक कार्य करना विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक रहेगा। इस समय पवित्र नदियों में स्नान करना, सूर्य को अर्घ्य देना और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है।
मकर संक्रांति पर करें ये विशेष पूजा
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव के साथ-साथ माता गायत्री और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। पौष मास में सूर्य और विष्णु की उपासना करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है, आयु में वृद्धि होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। सूर्य की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
मोक्ष देने वाला पर्व क्यों कहलाती है मकर संक्रांति’
शास्त्रों के अनुसार सूर्य के उत्तरायण काल को अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति उत्तरायण में देह त्याग करता है, उसे जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है और वह बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। इसी कारण मकर संक्रांति को मोक्ष प्रदान करने वाला पर्व भी कहा गया है।
मकर संक्रांति के दिन करें ये शुभ उपाय
इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। मकर संक्रांति पर चावल, मूंग की दाल, काले तिल, गुड़, तांबे के बर्तन, ऊनी वस्त्र और जरूरतमंदों के लिए उपयोगी वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही जीवन में चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।





