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Friday, March 20, 2026
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प्रभु श्रीराम ने इस दिव्यास्त्र से किया था रावण का वध

प्रभु श्रीराम ने इस दिव्यास्त्र से किया था रावण का वध लाइफ़स्टाइल डेस्क। जब प्रभु श्री राम सीता जी को लेने लंका गए तो रावण ने अपने संबंधियों और पुत्रों को युद्ध करने भेजा, लेकिन राम जी और रावण के बीच अश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया से युद्ध आरंभ होकर दशमी तिथि तक ही चला। कुल बत्तीस दिनों तक राम और रावण में युद्ध होता रहा, रावण ज्ञानी होने के साथ बहुत शक्तिशाली भी था। उसे मारना बहुत मुश्किल था। लेकिन विभीषण ने प्रभु श्रीराम को बताया कि रावण को तभी मारा जा सकता है, जब उसकी नाभि पर प्रहार किया जाए। साथ ही विभीषण ने एक विशेष अस्त्र के बारे में भी बताया था। जिससे रावण को मारा जा सकता था। उसके बिना रावण को मारना असंभव था। जानते है क्या था वह अस्त्र और प्रभु श्री राम ने कैसे किया उसको प्राप्त… राम जी और रावण के मध्य चले युद्ध में दो प्रकार के धनुष की जिक्र मिलता है। एक जो प्रभु श्री राम का धनुष था, जिसे वह सदैव धारण करते थे। उसे कोदंड कहा जाता था, अर्थात् बांस का बना हुआ, यह धनुष बहुत आलौकिक था। इसे सिर्फ प्रभु श्रीराम धारण कर सकते थे। कहा जाता है कि इस धनुष से छोड़ा गया बाण अपने लक्ष्य को भेदकर ही वापस आता था। लेकिन राम जी सदैव अपने धनुष का उपयोग तभी करते थे, जब बहुत आवश्यक हो। परंतु रावण के वध इस धनुष से नहीं किया गया था। रावण के वध के लिए एक विशेष धनुष की आवश्यकता थी। जानते हैं.. वह धनुष जिससे किया राम जी ने किया रावण का वध जब प्रभु श्री राम और रावण के बीच भीषण युद्ध होने लगा और रावण पर किसी अस्त्र का प्रभाव नहीं हो रहा था, रावण को मारना मुश्किल हो रहा था। तब विभीषण ने प्रभु श्री राम को बताया कि रावण को मारने के लिए एक विशेष अस्त्र की आवश्यकता है, नहीं तो यह युद्ध ऐसे ही चलता रहेगा। यह अस्त्र ब्रह्मा जी ने रावण को प्रदान किया है। जिसे महारानी मंदोदरी (रावण की पत्नी) के कक्ष में छिपाया गया है। लेकिन अब समस्या यह थी कि उस अस्त्र को प्राप्त कैसे किया जाए, तभी हनुमान जी ने ऐसे प्राप्त किया वह अस्त्र.. हनुमान जी ने वृद्ध ब्राह्मण का वेश धारण किया और महारानी मंदोदरी के समक्ष पहुंच गए। वे प्रसन्नता के साथ ब्राह्मणदेव के आदर सत्कार में लग गई। ब्राह्मण के वेश में आए हनुमान जी ने मंदोदरी से कहा कि विभिषण ने राम को उस विशेष दिव्यास्त्र के बारे में बता दिया है, जो आपके कक्ष में रखा है और जिससे रावण का वध किया जा सकता है। हनुमान जी ने कहा कि माते आपको वह अस्त्र कहीं छिपा देना चाहिए। मंदोदरी यब बात सुनकर घबरा गई, और वह तुरंत उस स्थान पर गई जहां पर अस्त्र छिपाकर रखा गया था। उस समय हनुमान जी ने अपना वेष धारण कर लिया और वे मंदोदरी से वह दिव्यास्त्र छीनकर आकाश मार्ग से वहां से चले गए। Thank You, Like our Facebook Page – @24GhanteUpdate 24 Ghante Online | Latest Hindi News-24ghanteonline.com

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