नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ब्रिटेन दौरे पर गए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लंदन में खालिस्तानी समर्थकों के हमले का सामना करना पड़ा। जब वह चैथम हाउस में चर्चा सत्र के बाद बाहर निकल रहे थे, तभी कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी की ओर दौड़ने की कोशिश की। इस दौरान, भारतीय ध्वज को फाड़ने की भी घटना सामने आई।
प्रदर्शनकारियों का हंगामा
हमले की यह घटना एक वीडियो में भी रिकॉर्ड हुई, जिसमें देखा गया कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने भारतीय झंडे का अपमान किया। प्रदर्शनकारियों ने जयशंकर के कार्यक्रम को बाधित करने का भी प्रयास किया और सरकार विरोधी नारे लगाए। ब्रिटेन में हुई इस घटना ने भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर ब्रिटिश पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि उन्होंने भारतीय गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए उचित कदम क्यों नहीं उठाए। इससे पहले भी ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका में खालिस्तानी समर्थकों द्वारा इसी तरह की घटनाएं देखने को मिली हैं।
क्या ब्रिटेन सरकार करेगी कार्रवाई?
इस घटना के बाद यह देखना अहम होगा कि ब्रिटेन सरकार खालिस्तानी समर्थकों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं। भारत सरकार ने पहले भी ब्रिटेन और कनाडा से खालिस्तानी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। विदेश मंत्री जयशंकर की यह यात्रा भारत-ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से थी। उनकी इस यात्रा के दौरान व्यापार, रक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इस घटना का इन संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
एस. जयशंकर की यह यात्रा 9 मार्च तक जारी रहेगी। 6-7 मार्च को वह आयरलैंड जाने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात आयरिश विदेश मंत्री साइमन हैरिस से होगी। साथ ही, वह वहां बसे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिलेंगे। अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, विदेश सचिव डेविड लैमी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकात की। उन्होंने भारत-ब्रिटेन के द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग और आपसी संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।
इस हमले के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत सरकार ने ब्रिटेन से अपने राजनयिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। यह घटना दिखाती है कि विदेशों में भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। अब यह देखना होगा कि ब्रिटेन सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या कोई ठोस कदम उठाती है।





