नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लद्दाख के लेह में भड़की हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और करीब 90 लोग घायल हो गए। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने लेह शहर में कर्फ्यू को सख्ती से लागू किया है।
दिल्ली पहुंचेगा लद्दाख प्रतिनिधिमंडल
तनाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने लेह में विशेष दूत भेजा है। वहीं, लेह और कारगिल से तीन-तीन प्रतिनिधियों वाला छह सदस्यीय दल गुरुवार शाम दिल्ली रवाना हुआ। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के अध्यक्ष थुप्स्तान छेवांग ने कहा कि केंद्र बातचीत के लिए तैयार है और जल्द ही समाधान की कोशिश होगी।
स्कूल और कॉलेज दो दिन के लिए बंद
वर्तमान स्थिति को देखते हुए लेह के जिला मजिस्ट्रेट रोमिल सिंह डोनक ने शुक्रवार से दो दिन के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। हिंसा की वजह से पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अपनी भूख हड़ताल बीच में ही खत्म करनी पड़ी। उन्होंने इसे लद्दाख के लिए “सबसे दुखद दिन” बताया और युवाओं से हिंसा रोकने की अपील की। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन हमेशा शांतिपूर्ण होना चाहिए।
केंद्र ने ठहराया जिम्मेदार
केंद्र सरकार ने इस अशांति के लिए सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि उनके बयानों से ही भीड़ उग्र हुई। गृह मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि हिंसा में विदेशी तत्व शामिल हो सकते हैं, क्योंकि घायलों में तीन नेपाली नागरिक पाए गए हैं। वहीं, वांगचुक ने कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। लद्दाख में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। एक ओर जहां केंद्र सरकार बातचीत की तैयारी कर रही है, वहीं प्रशासन शांति और नियंत्रण बनाए रखने में जुटा है।




