नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के रेप और मर्डर की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। ये घटना हर उस लड़की के अंदर के डर को साक्षात कर देती है जो पढ़ने के लिए, काम करने के लिए घर से बाहर निकलती है। इस घटना को लेकर देशभर में आक्रोश है। ये एक अस्पताल के अंदर, एक डॉक्टर के साथ हुई हिंसा है, जिसकी वजह से मेडिकल फील्ड से जुड़े लोग इसके खिलाफ एकजुट होकर खड़े हैं।
इंडियन मेडिकल असोसिएशन यानी IMA के आह्वान पर आज यानी 17अगस्त को पूरे देश में डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। हालांकि, इस हड़ताल से इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर सेवाओं को अलग रखा गया है। इस घटना को लेकर IMA के इमीजिएट पास्ट नैशनल प्रेसिडेंट डॉक्टर शरद कुमार अग्रवाल ने raftaar.in से बात की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझते हैं, इसलिए वो लंबी हड़ताल पर नहीं जा रहे हैं। लेकिन अब अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ कड़े कानून बनाने की और अस्पतालों के अंदर सुरक्षा बढ़ाने की सख्त ज़रूरत है।
हर दिन हिंसा झेलते हैं देश के डॉक्टर्स
डॉक्टर अग्रवाल ने कहा, ‘डॉक्टर्स की ट्रेनिंग इतनी रिगरस होती है। वो एक मुश्किल परीक्षा देकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेते हैं। इस एग्जाम में केवल 5 प्रतिशत सक्सेस रेट होता है। पांच साल तक वो 12 घंटे-14 घंटे तक पढ़ते हैं, ड्यूटी करते हैं और उसके बाद 17 सब्जेक्ट्स को पास करके MBBS पूरा करते हैं। इसके बाद वो एक और मुश्किल परीक्षा देकर PG में एडमिशन लेते हैं। जिसमें 5 लाख-6 लाख बच्चों में केवल 60 हजार सीटें होती हैं। वो फिर एमडी करते हैं, इस दौरान वो 48 घंटे-72 घंटे की ड्यूटी लगातार करते हैं, इसके साथ वो ड्यूटी भी करते हैं और थीसिस भी लिखते हैं। मैं ये इसलिए बता रहा हूं कि आप समझें कि कितनी कठिनाई और मेहनत के बाद एक व्यक्ति डॉक्टर बनता है।’
डॉक्टर अग्रवाल आगे कहते हैं, ‘इसके बाद हर दिन हमारे देश में डॉक्टरों पर हिंसा हो’ती है। शायद ही ऐसा कोई दिन आता होगा जिसमें डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स पर हिंसा नहीं होती। लेकिन कहीं न कहीं तो इंतेहां होती है, जब कोई पानी में आपको डूबो दे तो एक पॉइंट आता है जब आप सांस नहीं ले पाते और आप हाथ-पैर मारते हैं। वो ही स्थिति इस समय मेडिकल प्रोफेशन के साथ है। ये ऐसी एक घटना नहीं है, ऐसी घटनाएं आए दिन मेडिकल प्रोफेशनल्स के साथ होती रहती है।’
डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या करेगा IMA?
डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए IMA ने सरकार से चार मांगें की हैं। उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि नेता इन मुद्दों पर बयानबाजी करने की बजाए डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर काम करें। उन्होंने कहा कि IMA ने डॉक्टरों पर होने वाली हिंसा के खिलाफ एक Central Act बनाने की मांग की है। IMA की मांग है कि भारत न्याय संहिता के तहत इस कानून में गैर-जमानती धाराएं जोड़ी जाएं और इसमें दोषी पाए जाने वालों को कम से कम आठ साल की सज़ा का प्रावधान किया जाए। इसके साथ ही IMA ने मांग की है कि अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाई जाए। इसमें सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के साथ-साथ CCTV जैसी तकनीक से निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
‘डॉक्टर भगवान नहीं हैं, उन पर भरोसा रखें’
डॉक्टर अग्रवाल ने ये भी कहा कि कोई भी डॉक्टर अपने मरीज को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहता है लेकिन सबकुछ डॉक्टर के हाथ में नहीं होता। वो भगवान नहीं होता है, ऐसा होता तो कोई डॉक्टर कभी मरता नहीं और न ही डॉक्टरों के परिवार वालों की मौत होती। डॉक्टर अग्रवाल कहते हैं कि आपको अपने डॉक्टर पर भरोसा रखना होगा, उसके इलाज पर भरोसा करना होगा। जिस डॉक्टर पर भरोसा न हो, उसके पास न जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गूगल से मिले अपने ज्ञान के आधार पर कभी भी अपने डॉक्टर को जज न करें।
डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि IMA के एक डेलिगेशन ने बीते दिनों स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी और उन्होंने अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम दुरुस्त करवाने का आश्वासन दिया है। हालांकि, IMA की मांग है कि केंद्र सरकार डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द कड़े कानून बनाए।





