नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ओडिशा के मयूरभंज जिले के खंडदेउला सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां सहायक शिक्षिका सुकांति कर ने बच्चों को केवल इसलिए बेरहमी से पीटा क्योंकि उन्होंने सुबह की प्रार्थना के बाद उनके पैर नहीं छुए।
बच्चों को लाइन में खड़ा कर पीटा
सुबह स्कूल में रोज की तरह प्रार्थना सभा हुई। परंपरा के मुताबिक, बच्चे प्रार्थना के बाद शिक्षकों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। लेकिन उस दिन शिक्षिका प्रार्थना सभा में देर से पहुंचीं। जब तक वह आईं, बच्चे तितर-बितर हो चुके थे। गुस्से में उन्होंने छात्रों को बुलाया, उन्हें लाइन में खड़ा किया और बांस की छड़ी से पीटना शुरू कर दिया। पिटाई के दौरान एक लड़के का हाथ टूट गया और एक लड़की बेहोश हो गई। घायल बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। घटना की खबर फैलते ही स्कूल और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
स्कूल प्रबंधन ने की कार्रवाई
प्रधानाध्यापक पूर्णचंद्र ओझा और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बिप्लव कर समेत अन्य अधिकारियों ने स्कूल पहुंचकर जांच की। जांच में पुष्टि हुई कि शिक्षिका ने बच्चों को शारीरिक दंड दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत प्रभाव से शिक्षिका को सस्पेंड कर दिया।
कानून के खिलाफ है शारीरिक दंड
भारत में बच्चों को शारीरिक दंड देना कानूनन प्रतिबंधित है। बावजूद इसके ऐसी घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं। शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि बच्चों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन लेगा और दोषी शिक्षिका के खिलाफ आगे कड़ी कार्रवाई होगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोग और अभिभावक बेहद नाराज़ हैं। उनका कहना है कि बच्चों से सम्मान जबरन नहीं लिया जा सकता। टीचर का काम बच्चों को पढ़ाना और उनका मार्गदर्शन करना है, न कि उन्हें डराना-धमकाना।





